Edited By Mansa Devi,Updated: 20 Feb, 2026 12:09 PM

कैंसर को अक्सर बड़ी उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यह धारणा बदल रही है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में बच्चों और किशोरों में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 20 वर्ष से कम उम्र...
नेशनल डेस्क: कैंसर को अक्सर बड़ी उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में यह धारणा बदल रही है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में बच्चों और किशोरों में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कैंसर का खतरा पहले की तुलना में अधिक नजर आ रहा है। World Health Organization के आंकड़ों के अनुसार हर साल 0 से 19 वर्ष की आयु के लगभग चार लाख बच्चों में कैंसर का पता चलता है। विकसित और उच्च आय वाले देशों में आधुनिक इलाज और समय पर जांच के कारण 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे ठीक हो जाते हैं, जबकि भारत जैसे देशों में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम है। इसके पीछे जागरूकता की कमी, देर से पहचान और इलाज तक सीमित पहुंच को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
सोनीपत स्थित Andromeda Cancer Hospital में चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. नेहा गर्ग का कहना है कि बदलती जीवनशैली बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है। उनका मानना है कि असंतुलित खानपान, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों में कमी, बढ़ता प्रदूषण और अधिक स्क्रीन टाइम जैसी आदतें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। हालांकि कैंसर के कई मामलों में सटीक कारण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन अस्वस्थ जीवनशैली एक जोखिम कारक के रूप में सामने आ रही है।
बच्चों में सबसे ज्यादा होने वाले कैंसर (0-14 साल)
ल्यूकेमिया (खून का कैंसर)- ये बच्चों में होने वाला सबसे कॉमन कैंसर है जिसके करीब 30% मामले सामने आते हैं। ब्रेन ट्यूमर और स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर- ये बच्चों में दूसरा सबसे आम कैंसर है। लिंफोमा- लसीका तंत्र का कैंसर भी बच्चों में ज्यादा होता है। न्यूरोब्लास्टोमा और विल्म्स ट्यूमर- ये कैंसर किडनी में होता है और बच्चों में होने वाले कैंसर में से एक है। बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षण
विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए उनकी पहचान करना आसान नहीं होता। कई बार माता-पिता थकान, बुखार या दर्द को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि बच्चे को लगातार थकान और सुस्ती बनी रहे और आराम के बाद भी सुधार न हो, बिना कारण वजन घटने लगे या भूख कम हो जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। शरीर पर बार-बार नीले निशान पड़ना या बिना वजह खून बहना, लंबे समय तक बुखार रहना, हड्डियों या जोड़ों में दर्द के कारण चलने में दिक्कत होना भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। सुबह के समय सिरदर्द के साथ उल्टी आना, गर्दन, बगल या पेट में गांठ या सूजन महसूस होना, आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव या आंख में सफेद चमक दिखना जैसे लक्षण भी अनदेखे नहीं करने चाहिए।
डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन यदि कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या बिना स्पष्ट कारण के दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही इलाज से बच्चों में कैंसर के कई मामलों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाना, संतुलित आहार देना, बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे के व्यवहार और स्वास्थ्य में किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।