Edited By Parveen Kumar,Updated: 21 Jan, 2026 05:47 PM

राजस्थान के उदयपुर जिले में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आदिवासी अंचल कोटड़ा में सवारियों से भरी एक जीप अचानक बेकाबू होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन...
नेशनल डेस्क: राजस्थान के उदयपुर जिले में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आदिवासी अंचल कोटड़ा में सवारियों से भरी एक जीप अचानक बेकाबू होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक, यह जीप बिलवन की ओर से कोटड़ा की तरफ जा रही थी। जैसे ही वाहन चढ़ाई वाले रास्ते पर पहुंचा, अचानक उसके ब्रेक फेल हो गए। ड्राइवर ने जीप को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन वजन ज्यादा होने के कारण वाहन पर उसका नियंत्रण नहीं रह सका। देखते ही देखते जीप सड़क से फिसलकर करीब 60 फीट गहरी खाई में जा गिरी। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त जीप में कुल 27 लोग सवार थे, जो इसकी निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा है।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने ही पुलिस को सूचना दी। इसके बाद कोटड़ा पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को खाई से बाहर निकालकर कोटड़ा अस्पताल पहुंचाया गया।
इस हादसे में काबू पिता नरसा गरासिया, रेशमी पति वख्ता गरासिया और सुरेश पिता रोशन गरासिया की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों शवों को कोटड़ा अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया गया है।
बताया जा रहा है कि कोटड़ा क्षेत्र पूरी तरह आदिवासी इलाका है, जहां परिवहन के लिए जीपों पर ही लोगों की निर्भरता है। यहां 120 से ज्यादा जीपें चलती हैं, जिनमें से ज्यादातर ओवरलोड होकर सवारियां ढोती हैं। इससे पहले भी इस इलाके में ओवरलोडिंग के कारण कई हादसे हो चुके हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके हालात जस के तस बने हुए हैं।
बुधवार को हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती, तो शायद इस तरह के हादसों को रोका जा सकता था। आदिवासी अंचल में लगातार हो रहे हादसे प्रशासन की लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं, जिस पर अब गंभीर कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।