Edited By Parveen Kumar,Updated: 03 Oct, 2026 11:40 PM

गौतमबुद्ध नगर जिले की एक अदालत ने दादरी क्षेत्र में एक महिला की हत्या के मामले में उसके पति समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दादरी निवासी ईनाम, उसके भाई बबलू और बुलंदशहर निवासी आजाद पर 50-50 हजार रुपये का...
नेशनल डेस्क : गौतमबुद्ध नगर जिले की एक अदालत ने दादरी क्षेत्र में एक महिला की हत्या के मामले में उसके पति समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दादरी निवासी ईनाम, उसके भाई बबलू और बुलंदशहर निवासी आजाद पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है तथा जुर्माना नहीं भरने पर तीनों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 जुलाई 2015 को इस्लामुद्दीन नाम के एक व्यक्ति ने दादरी थाने में अपनी बहन वरीसा की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया था कि वरीसा की शादी करीब 15 साल पहले ईनाम से हुई थी और दंपती के चार बच्चे हैं। उसने आरोप लगाया कि ईनाम अपनी पत्नी पर शक करता था और इसे लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था।
अभियोजन के मुताबिक, घटना वाले दिन दोपहर करीब डेढ़ बजे ईनाम वरीसा को एक कमरे में ले गया, जहां उसका बड़ा भाई बबलू और आजाद भी मौजूद थे। ईनाम ने बच्चों को घर से बाहर भेज दिया था। उसने बताया कि कुछ देर बाद तीनों कमरे से बाहर निकले और बच्चों ने अपनी मां के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि वह ननिहाल गई है लेकिन बाद में वरीसा के मायके वालों को भी उसके लापता होने की जानकारी दी गई। अभियोजन के अनुसार, शक होने पर इस्लामुद्दीन दादरी के किदवई नगर स्थित अपनी बहन के घर पहुंचा जहां उसे सामान अस्त-व्यस्त मिला और बिस्तर के अंदर बने बॉक्स को खोलने पर वरीसा का शव उसमें मिला। पुलिस जांच में सामने आया कि वरीसा की गला घोंटकर हत्या की गई थी।
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के प्रवक्ता ने बताया कि जांच में ईनाम द्वारा पत्नी पर शक किए जाने की बात भी सामने आई थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ हत्या के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कम सजा दिए जाने का अनुरोध किया था जबकि अभियोजन पक्ष ने कड़ी सजा की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईनाम, बबलू और आजाद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।