UPI New Rules : बदलने जा रहे यूपीआई के नियम, Google Pay-PhonePe यूजर्स पर पड़ेगा सीधा असर

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 07:01 PM

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अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी, बिल पेमेंट या पैसे ट्रांसफर के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। फरवरी 2026 से UPI सिस्टम में कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM जैसे सभी UPI...

नेशनल डेस्क : अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी, बिल पेमेंट या पैसे ट्रांसफर के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। फरवरी 2026 से UPI सिस्टम में कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर Google Pay, PhonePe, Paytm और BHIM जैसे सभी UPI ऐप्स पर दिखेगा। इन नए नियमों का मकसद डिजिटल पेमेंट को पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

10 सेकंड में पूरा होगा UPI ट्रांजैक्शन

नए नियमों के तहत UPI ट्रांजैक्शन और उससे जुड़े API रिस्पॉन्स को अधिकतम 10 सेकंड में पूरा करना अनिवार्य होगा। अभी तक यह समय सीमा 30 सेकंड तक थी, जिसके चलते कई बार पेमेंट अटक जाते थे। API वह तकनीकी सिस्टम है जो आपके UPI ऐप और बैंक के बीच कनेक्शन बनाता है। समय सीमा घटने से पीक टाइम में भी ट्रांजैक्शन ज्यादा स्मूथ और तेज होंगे, जिससे दुकानदार और ग्राहक- दोनों को राहत मिलेगी।

बढ़ते डिजिटल ट्रैफिक के लिए सिस्टम होगा मजबूत

भारत में डिजिटल पेमेंट का दायरा लगातार बढ़ रहा है और UPI हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसी बढ़ते दबाव को संभालने के लिए नए नियम लाए गए हैं। हाई ट्रैफिक के दौरान ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या को कम करने पर खास फोकस किया गया है। उम्मीद है कि Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म पर अब प्रोसेसिंग ज्यादा स्टेबल और भरोसेमंद रहेगी।

सुरक्षा और यूजर कंट्रोल होंगे और सख्त

UPI के नए फ्रेमवर्क में सिक्योरिटी लेयर को और मजबूत किया गया है। खासतौर पर बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन में अतिरिक्त वेरिफिकेशन स्टेप जोड़े जाएंगे। पेमेंट से पहले एक क्लियर कन्फर्मेशन स्क्रीन दिखेगी, ताकि गलती से गलत खाते में पैसा ट्रांसफर न हो। इसके अलावा ऑटो-डेबिट और सब्सक्रिप्शन पेमेंट को मैनेज या कैंसिल करना भी पहले से आसान होगा, जिससे यूजर्स को अपने पैसों पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा।

इनएक्टिव UPI ID और स्पैम पर लगेगी लगाम

जो UPI ID लंबे समय से इस्तेमाल नहीं की गई हैं, उन्हें अस्थायी रूप से सीमित किया जा सकता है। दोबारा एक्टिव करने के लिए री-वेरिफिकेशन जरूरी होगा, जिससे फ्रॉड की आशंका कम होगी। वहीं, फेल या अटके ट्रांजैक्शन को तेजी से सुलझाने के नए नियम भी लागू होंगे, जिससे कई मामलों में रिफंड कुछ ही घंटों में मिल सकेगा। साथ ही बार-बार आने वाली कलेक्ट रिक्वेस्ट यानी पैसे मांगने वाले नोटिफिकेशन की संख्या पर भी सीमा तय की जाएगी, ताकि स्पैम से राहत मिले।                                                                                                                                                                                                                                         

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