Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Feb, 2026 10:45 AM

अगर आप उन रेल यात्रियों में से हैं जो यह सोचते हैं कि बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन छूटने के बाद आप अगले स्टेशन से कोच में दाखिल हो जाएंगे और आपकी सीट सुरक्षित रहेगी, तो सावधान हो जाइए। भारतीय रेलवे अपने नियमों में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव कर रहा है जो...
नेशनल डेस्क: अगर आप उन रेल यात्रियों में से हैं जो यह सोचते हैं कि बोर्डिंग स्टेशन पर ट्रेन छूटने के बाद आप अगले स्टेशन से कोच में दाखिल हो जाएंगे और आपकी सीट सुरक्षित रहेगी, तो सावधान हो जाइए। भारतीय रेलवे अपने नियमों में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव कर रहा है जो आपकी इस बेफिक्री को भारी नुकसान में बदल सकता है। अब रेलवे की 'वेट एंड वॉच' वाली नीति खत्म होने जा रही है और इसकी जगह 'इंस्टेंट अलॉटमेंट' सिस्टम लेने वाला है।
TTE की 'रहमदिली' अब बीते दौर की बात
पुराने ढर्रे के अनुसार, अगर कोई यात्री अपने तय स्टेशन से ट्रेन में नहीं चढ़ता था, तो टीटीई अगले एक या दो स्टेशनों तक उसकी सीट को खाली रखता था। उम्मीद यह रहती थी कि शायद यात्री अगले स्टॉपेज से बोर्ड कर ले। लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। नए सिस्टम के तहत, जैसे ही टीटीई को आपकी सीट खाली दिखेगी, वह अपने हाथ में मौजूद डिजिटल डिवाइस (EFT) पर उसे 'नॉट टर्न अप' (यात्री नहीं पहुंचा) मार्क कर देगा।
तकनीक का कमाल: पलक झपकते ही सीट किसी और की
जैसे ही आपकी अनुपस्थिति दर्ज होगी, वह सीट ऑटोमैटिकली सिस्टम में 'खाली' दिखने लगेगी। फिर क्या होगा? ट्रेन में पहले से धक्के खा रहे RAC या वेटिंग लिस्ट वाले किसी खुशकिस्मत यात्री के मोबाइल पर तुरंत एक मैसेज पहुंचेगा और आपकी वह सीट पल भर में उसे अलॉट कर दी जाएगी। यानी अब न तो TTE को खुशामद करने की जरूरत पड़ेगी और न ही यात्री को उनके पीछे भागना होगा। सारा खेल सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शी और बिजली की रफ्तार से होगा।
आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
आंकड़ों का गणित देखें तो हर ट्रेन में औसतन 3 से 5 प्रतिशत यात्री ऐसे होते हैं जो टिकट कन्फर्म होने के बावजूद सफर पर नहीं निकलते। रेलवे की कोशिश है कि एक भी सीट खाली न रहे और जरूरतमंद यात्रियों को तुरंत जगह मिले। इसके लिए रेल सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव कर रहा है, जिससे देशभर की ट्रेनों में सीटों का मैनेजमेंट हाई-टेक हो जाएगा।
बोर्डिंग स्टेशन का रखें खास ख्याल
रेलवे की इस नई सख्ती का सीधा संदेश यह है कि आपने जहां से चढ़ने का टिकट लिया है, वहीं से ट्रेन पकड़ें। अगर आप अपना बोर्डिंग पॉइंट बदलना चाहते हैं, तो यह काम चार्ट बनने से कम से कम 24 घंटे पहले ही कर लें। चार्ट बनने के बाद न तो आपका स्टेशन बदला जा सकेगा और न ही आप अगले स्टेशन से अपनी सीट पर अपना हक जता पाएंगे। आपकी जरा सी देरी किसी और के सफर को आरामदायक बना देगी!