Edited By Monika Jamwal,Updated: 20 Sep, 2022 02:05 PM

कश्मीर हर लिहाज से खूबसूरत है। कश्मीर का सेब हो, केसर हो या फिर अखरोट, यहां हर चीज लजीज, लाजवाब और लुत्फ देने वाली है।
श्रीनगर: कश्मीर हर लिहाज से खूबसूरत है। कश्मीर का सेब हो, केसर हो या फिर अखरोट, यहां हर चीज लजीज, लाजवाब और लुत्फ देने वाली है। बात करें अगर कश्मीरी अखरोट की तो जानकर हैरान होंगे आप कि कश्मीर में दुनिया का सबसे बेहतरीन अखरोट मिलता है।
सल का यह समय वो होता है जब कश्मीरी किसान अखरोट और केसर की फसल को समेटने में लगा होता है। अखरोट की फसल को उसके आखिरी समय में सहेजना सबसे थकाने वाला काम होता है। इसमें साथियों की सहायता की आवश्यकता होती है।
लोग खेतों में गीत गाते हुये फसल को समेटने का काम करते हैं। कश्मीर में यह एक जश्न की तरह होता है। अखरोट को कश्मीरी में दोयन कहते हैं।
आपको बता दें कि कश्मीर में हर वर्ष 89,000 हैक्टेयर में करीब 2.66 लाख मिटिरक टन अखरोट पैदा किया जाता है। इस वर्ष अखरोट की पैदावार में कुपवाड़ा ने बाजी मारी है। देश में अखरोट की फसल का 90 प्रतिशत कश्मीर में उगाया जाता है। कश्मीर में तीन किस्म के अखरोट की पैदावार होती है-वोंथ, कागजी और बराजुल।
वोंथ को मुख्यतः तेल के लिए उगाया जाता है। कागजी को उसके लंबे फल के लिए और बराजुल का स्वाद क्रीमी होता है। इस फसल को बिना कैमिकल वाली खाद के ही उगाया जाता है।
जम्मू कश्मीर का कृषि विभाग और फ्रूट ग्रोअरस एसोसिएशन मिलकर किसानों को उनकी फसल इंटरनेशनल व नेशनल मर्केट में बेचने में मद्द करती हैं।
दोयन कश्मीरी संस्कृति का एक अहमद हिस्सा होता है और त्यौहारों पर लोग इसे रिश्तेदारों में बांटते हैं।