Alert: अंतरिक्ष में मचने वाली है तबाही, अंधेरे में डूब जाएगी दुनिया, Mobile-Internet सब हो जाएगा ठप!

Edited By Updated: 23 Mar, 2026 11:09 AM

space war 2 0 will internet and gps stop working in the next 2 years

आधुनिक दुनिया जिस तकनीक (जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग) पर टिकी है उस पर अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का काला साया मंडरा रहा है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 24 महीनों के भीतर ‘सैटेलाइट एपोकैलिप्स’ (उपग्रहों की महातबाही) का...

AI Cyberattack Warning : आधुनिक दुनिया जिस तकनीक (जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग) पर टिकी है उस पर अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का काला साया मंडरा रहा है। अंतरिक्ष विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 24 महीनों के भीतर ‘सैटेलाइट एपोकैलिप्स’ (उपग्रहों की महातबाही) का खतरा हकीकत बन सकता है। यह संकट किसी उल्कापिंड से नहीं बल्कि एआई आधारित घातक साइबर हमलों से पैदा हो रहा है।

एजेंटिक AI: बिना इंसान के हमला करने वाला डिजिटल शैतान

साइबर अपराधी अब ‘एजेंटिक एआई’ (Agentic AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक ऐसा सिस्टम है जो बिना किसी मानवीय निर्देश के खुद फैसले ले सकता है। यह एआई खुद ही सैटेलाइट की सुरक्षा कमियों को ढूंढता है और उन पर हमला करने की नई चालें चलता है। पहले किसी सैटेलाइट सिस्टम को समझने में महीनों लगते थे लेकिन अब एआई कुछ ही सेकंड में पूरे सिस्टम को डिकोड कर देता है।

PunjabKesari

क्यों आसान है सैटेलाइट्स को निशाना बनाना?

अंतरिक्ष में मौजूद ज्यादातर सैटेलाइट उस पुराने दौर के हैं जब एआई का वजूद नहीं था। पुराने उपग्रहों में आधुनिक एन्क्रिप्शन (Encryption) और सुरक्षित पासवर्ड सिस्टम नहीं है। जमीन पर मौजूद कंप्यूटरों की तरह अंतरिक्ष में तैर रहे सैटेलाइट्स को आसानी से अपडेट नहीं किया जा सकता।

यह भी पढ़ें: BJP को लगा जोर का झटका! इस दिग्गज नेता ने बदला पाला, 'कमल' को अलविदा कह पंजे के साथ शुरू किया नया सफर

'केसलर सिंड्रोम': मलबे का वो चक्रवात जो सब खत्म कर देगा

अगर हैकर्स किसी सैटेलाइट का कंट्रोल हासिल कर लेते हैं तो वे उसे दूसरे सैटेलाइट से टकरा सकते हैं। इससे अंतरिक्ष में मलबे की एक ऐसी चेन रिएक्शन शुरू होगी जिसे केसलर सिंड्रोम कहा जाता है। इस टक्कर से पैदा हुआ मलबा अन्य सैटेलाइट्स को नष्ट कर देगा जिससे पृथ्वी की कक्षा (Orbit) हमेशा के लिए बेकार हो जाएगी। इसके बाद न जीपीएस काम करेगा न ही मिसाइल डिफेंस सिस्टम।

PunjabKesari

क्या दुनिया इस खतरे के लिए तैयार है?

नासा (NASA) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) जैसे संस्थान अब 'एआई आधारित डिफेंस सिस्टम' बना रहे हैं। अमेरिका के एनआईएसटी (NIST) का मानना है कि हमें अब ऐसे डिजाइन तैयार करने होंगे जो हैक होने के बाद भी खुद को रिकवर कर सकें। हालांकि रूस और अन्य देशों के हैकिंग ग्रुप्स की सक्रियता ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।

PunjabKesari

बचाव का रास्ता: एआई ही बनेगा रक्षक

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस एआई से खतरा है वही समाधान भी है। एआई आधारित सुरक्षा सिस्टम किसी भी इंसान से ज्यादा तेजी से साइबर हमलों को पहचान कर उन्हें नाकाम कर सकते हैं। अगले 2 साल यह तय करेंगे कि हमारा 'डिजिटल भविष्य' सुरक्षित रहेगा या हम फिर से पुराने दौर में लौट जाएंगे।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!