Edited By Ramanjot,Updated: 21 Jan, 2026 11:29 PM

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही Special Intensive Revision (SIR) 2026 प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार, पुलिस और प्रशासन के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नेशनल डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही Special Intensive Revision (SIR) 2026 प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार, पुलिस और प्रशासन के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई 19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में की गई है, जिसमें याचिका संख्या 1089/2025 समेत जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई थी।
आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि मतदाता सूची के संशोधन और दस्तावेज सत्यापन के दौरान कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय है।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस
ECI ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर, सभी जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षकों को लिखित निर्देश भेजे हैं। आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़ी सुनवाई, दस्तावेज जमा और आपत्ति दर्ज कराने वाले सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य रूप से किए जाएं।
यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से प्रक्रिया बाधित होती है या कोई अप्रिय घटना सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को निर्देश दिया गया है कि वे राज्य सरकार के सहयोग से पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करें।
पंचायत और ब्लॉक स्तर पर होगी सुनवाई
मतदाताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। अब SIR से जुड़ी सुनवाई, दस्तावेज जमा और आपत्तियां ग्राम पंचायत भवन,ब्लॉक कार्यालय, वार्ड कार्यालय और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की जाएंगी, ताकि लोगों को दूर-दराज नहीं जाना पड़े।
इसके साथ ही माध्यमिक (कक्षा 10) परीक्षा का एडमिट कार्ड और पास सर्टिफिकेट भी वैध पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार किए जाएंगे। सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी को तुरंत रसीद देना अनिवार्य होगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सभी दस्तावेजों को BLO द्वारा ऐप पर अपलोड करना भी जरूरी किया गया है।
1.25 करोड़ मतदाताओं को राहत, मिलेगा अतिरिक्त समय
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप, जिन मतदाताओं को Logical Discrepancy (जैसे उम्र में असंगति, माता-पिता के नाम में अंतर) या Unmapped Category में रखा गया है, उनकी सूची 24 जनवरी 2026 तक पंचायत, ब्लॉक और वार्ड कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाएगी।
इन श्रेणियों में आने वाले करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त 10 दिन का समय दिया गया है। वे चाहें तो खुद आने की बजाय अधिकृत प्रतिनिधि या बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से भी अपनी बात रख सकते हैं, बशर्ते उनके पास वैध प्राधिकरण पत्र हो।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुरूप कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और आम नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न डालने पर विशेष जोर दिया था। निर्वाचन आयोग ने अब राज्य प्रशासन को इन आदेशों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।