2013 यौन उत्पीड़न मामला: तरुण तेजपाल की मुश्किलें बढ़ेंगी या मिलेगी राहत?  HC के फैसले पर निगाहें

Edited By Updated: 05 Aug, 2026 07:49 PM

will tarun tejpal s troubles increase or will he receive relief all eyes are on

बम्बई उच्च न्यायालय 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर बृहस्पतिवार सुबह अपना फैसला सुनाएगा। तेजपाल को निर्देश दिया गया है कि वह उस गोवा पीठ के समक्ष मौजूद रहें,...

पणजी: बम्बई उच्च न्यायालय 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर बृहस्पतिवार सुबह अपना फैसला सुनाएगा। तेजपाल को निर्देश दिया गया है कि वह उस गोवा पीठ के समक्ष मौजूद रहें, जिसमें न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर शामिल हैं। इसी पीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई की थी।

यह मामला एक पूर्व कनिष्ठ सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उसने दावा किया था कि नवंबर 2013 में गोवा में थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा।

 मेहता ने दलील दी कि सत्र अदालत ने यौन उत्पीड़न पीड़िता के व्यवहार को लेकर पहले से बनी धारणाओं के आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन कर गंभीर गलती की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि किसी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया को लेकर कोई सार्वभौमिक मानक नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की शिक्षा, व्यक्तित्व, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। 

उन्होंने यह भी कहा था कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी, जबकि यह जांचना चाहिए था कि उसके मुख्य आरोपों में निरंतरता बनी रही या नहीं। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अभियोजन ने तेजपाल के माफी वाले ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घटना से पहले और बाद में उसका व्यवहार, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और दस्तावेजी रिकॉर्ड अभियोजन के मामले के विपरीत हैं। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि चलती लिफ्ट में शिकायतकर्ता को बंद रखे जाने का उसका बयान विशेषज्ञ साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज से मेल नहीं खाता।
 

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