पंजाब में कानून व्यवस्था का निकला जनाजा  : आर.पी. सिंह

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 09:04 PM

law and order has been laid to rest in punjab rp singh

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पंजाब की मौजूदा कानून-व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखे हमले किए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर एक विशेष रिपोर्ट जारी करते हुए उन्होंने दावा किया कि पंजाब में कानून का राज पूरी तरह...

चंडीगढ़: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने पंजाब की मौजूदा कानून-व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखे हमले किए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर एक विशेष रिपोर्ट जारी करते हुए उन्होंने दावा किया कि पंजाब में कानून का राज पूरी तरह खत्म हो चुका है और राज्य अब “डर के साए” में चल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले 3 महीनों में 34 पुलिस मुठभेड़ें हुई हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक तिहाई मुठभेड़ें उन आरोपियों के साथ हुईं , जो पहले से ही पुलिस हिरासत में थे। इन हिरासत मुठभेड़ों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी गंभीर चिंता जताई है। भाजपा का कहना है कि ये मुठभेड़ें सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए की जा रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।

सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि पंजाब में जबरन वसूली (Extortion) एक संगठित धंधा बन चुका है। इसके मुख्य निशाने पर छोटे कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, प्रॉपर्टी डीलर, ठेकेदार और दुकानदार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि डर के कारण लोग पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से भी घबराते हैं क्योंकि उन्हें बदले की कार्रवाई का भय है। पैसे न देने पर खुलेआम गोलियां चलाई जाती हैं और हत्याएं की जाती हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पंजाब में न तो आम आदमी सुरक्षित है और न ही आम आदमी पार्टी के अपने नेता। सार्वजनिक स्थानों, शादियों और बाजारों में खुलेआम हत्याएं हो रही हैं। गांवों के सरपंच और स्थानीय प्रतिनिधि भी गैंगस्टरों के निशाने पर हैं।

आर.पी. सिंह ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस की कार्रवाई इतनी प्रभावी है, तो फिर जबरन वसूली के रैकेट क्यों बढ़ रहे हैं और गैंगस्टर खुलेआम क्यों घूम रहे हैं? उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस राज्य में लोग शिकायत दर्ज कराने से डरें और खुलेआम हत्याएं हों, उसे सुरक्षित राज्य नहीं कहा जा सकता।

विशेष जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे

एक विशेष जांच रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच सिर्फ तीन महीनों में पंजाब पुलिस ने 34 मुठभेड़ें दर्ज की हैं। इसका मतलब है कि राज्य में औसतन हर तीसरे दिन एक पुलिस मुठभेड़ हो रही है। इन घटनाओं में 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 45 अन्य घायल हुए हैं। सिर्फ जनवरी 2026 में ही 15 ऐसी घटनाएं सामने आईं। आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2022 से अब तक गैंगस्टरों के साथ कुल 324 मुठभेड़ें हो चुकी हैं, जिनमें 24 मौतें और 515 गिरफ्तारियां हुई हैं।

हिरासत में मुठभेड़ों का बढ़ता रुझान

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि एक तिहाई से अधिक मुठभेड़ें तब हुईं जब आरोपी पहले से पुलिस हिरासत में थे। अधिकतर मामलों में पुलिस का दावा होता है कि आरोपी को “हथियार बरामदगी” के लिए ले जाया गया था, जहां उसने छिपा हुआ हथियार निकालकर पुलिस पर गोली चला दी और जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया या मारा गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इन “गैर-न्यायिक हत्याओं” के आरोपों पर पंजाब के गृह सचिव को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य है, लेकिन पंजाब में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

अमृतसर और लुधियाना मुख्य केंद्र

ये मुठभेड़ें पूरे पंजाब में फैली हुई हैं, लेकिन सबसे अधिक 9 मुठभेड़ें अमृतसर जिले में दर्ज की गई हैं। इसके बाद लुधियाना में 5 मुठभेड़ें हुई हैं। पुलिस का कहना है कि वे केवल “आत्मरक्षा” में गोली चलाते हैं और ज्यादातर आरोपियों के पैरों को निशाना बनाया जाता है।

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