ईरान के पास सिर्फ 10 दिन का समय, ट्रंप बोले- 'सौदा नहीं हुआ तो बहुत बुरा होगा'

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 09:27 PM

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव में अगले 10 दिनों के भीतर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर कोई “सार्थक समझौता” नहीं हुआ तो “बुरी चीजें होंगी।”

इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव में अगले 10 दिनों के भीतर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर कोई “सार्थक समझौता” नहीं हुआ तो “बुरी चीजें होंगी।”

वॉशिंगटन में दिया बयान

ट्रंप ने यह बात वॉशिंगटन में आयोजित “बोर्ड ऑफ पीस” कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने बताया कि ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है और अब तक की बातचीत “रचनात्मक” रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इतिहास गवाह है कि ईरान के साथ एक ठोस और प्रभावी समझौता करना आसान नहीं रहा है।

अमेरिकी वार्ताकारों की भूमिका

ट्रंप ने अमेरिकी वार्ताकारों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का जिक्र किया, जो ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये दोनों अच्छे लोग हैं और ईरानी प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठकों का माहौल सकारात्मक रहा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान इस समय “हॉटस्पॉट” बना हुआ है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश हो रही है।

“सार्थक समझौता जरूरी, नहीं तो बढ़ेगा कदम”

ट्रंप ने कहा, हम अच्छी बातचीत कर रहे हैं लेकिन सालों से यह साबित हुआ है कि ईरान के साथ एक सार्थक समझौता करना आसान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, हमें एक सार्थक समझौता करना होगा, नहीं तो बुरी चीजें होंगी। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका एक कदम आगे बढ़ सकता है, यानी कड़े कदम उठा सकता है, अगर 10 दिनों में समझौता नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “शायद हम समझौता कर लें, शायद नहीं। आपको अगले लगभग 10 दिनों में पता चल जाएगा।”

बढ़ता तनाव और सैन्य तैयारियां

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है।

समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers), लड़ाकू जेट और अतिरिक्त रक्षा प्रणाली को क्षेत्र में तैनात किया गया है। वहीं, सैटेलाइट तस्वीरों में यह भी देखा गया है कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सुरंगों के प्रवेश द्वारों को और सुरक्षित किया गया है और संवेदनशील ठिकानों पर कंक्रीट की अतिरिक्त परत चढ़ाई गई है। हालांकि, तेहरान लगातार यह कहता रहा है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है।

2015 परमाणु समझौते से लेकर अब तक

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के परमाणु समझौते (ईरान न्यूक्लियर डील) से अमेरिका को बाहर कर लिया था। उनका कहना था कि वह समझौता कमजोर था और पर्याप्त नहीं था। ट्रंप अब एक नए और ज्यादा सख्त समझौते की वकालत कर रहे हैं।पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden के कार्यकाल में पुराने समझौते को दोबारा जिंदा करने की कोशिश हुई थी, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया। हाल ही में Geneva में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसे दोनों पक्षों ने “रचनात्मक” बताया। लेकिन वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कई बड़े मतभेद बाकी हैं।

10 दिन का अल्टीमेटम

ट्रंप द्वारा दिया गया 10 दिन का समयसीमा संकेत देता है कि जल्द ही निर्णायक मोड़ आ सकता है। हालांकि फिलहाल किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक समयसीमा, सैन्य तैनाती और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव ने अमेरिका-ईरान संबंधों को फिर से वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि दोनों देश समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या टकराव की दिशा में।

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