Edited By PTI News Agency,Updated: 26 Jan, 2023 07:22 PM

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने सुझाव दिया है कि सरकार को स्मारकों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के लिए व्यापक मानदंड और विस्तृत प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने सुझाव दिया है कि सरकार को स्मारकों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के लिए व्यापक मानदंड और विस्तृत प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
ईएसी-पीएम ने अपनी रिपोर्ट ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारक- युक्तिसंगत बनाने की तत्काल आवश्यकता’ में इस ओर संकेत दिया कि राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों (एमएनआई) के संरक्षण तथा रख-रखाव पर अपर्याप्त खर्च होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को स्मारकों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने के लिए व्यापक मानदंड और विस्तृत प्रक्रिया अपनानीचाहिए।’’
भारत में 3,695 एमएनआई हैं जो एएसआई के अधीन हैं। ‘प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958’ में राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों तथा अवशेषों की घोषणा और संरक्षण के प्रावधान हैं।
ईएसी-पीएम के सदस्य संजीव सान्याल द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की गयी है कि इन स्मारकों से होने वाली आय क्रियान्वयन एजेंसियों के पास रहनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार एमएनआई की मौजूदा सूची में बड़ी संख्या में ऐसे स्मारक हैं जिन्हें 1947 से पहले औपनिवेशिक कानूनों के तहत यह पहचान दी गयी थी।
रिपोर्ट के अनुसार स्वतंत्रता के बाद सूची की व्यापक समीक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किये गये।
ईएसी-पीएम की यह भी राय है कि एमएनआई की सूची में भौगोलिक संतुलन बहाल करने के प्रयास होने चाहिए।
इसमें कहा गया है कि करीब 75 ब्रिटिश कालीन कब्रिस्तान या शमशान को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इसी तरह एमएनआई घोषित अनेक स्मारक स्थानीय महत्व के हैं और उनका असल में कोई राष्ट्रीय महत्व नहीं है।’’
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