उच्च न्यायालय ने वायुसेना में भर्ती में लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई बंद की

Edited By Updated: 27 May, 2023 11:48 AM

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नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वायुसेना के किसी भी विभाग में तकनीकी और गैर तकनीकी श्रेणियों में ‘एयरमैन’ के तौर पर महिलाओं की भर्ती नहीं होने पर उसमें (वायुसेना में) लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई...

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वायुसेना के किसी भी विभाग में तकनीकी और गैर तकनीकी श्रेणियों में ‘एयरमैन’ के तौर पर महिलाओं की भर्ती नहीं होने पर उसमें (वायुसेना में) लैंगिक भेदभाव का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है।
उच्च न्यायालय ने कहा है कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती के मद्देनजर अब कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले सप्ताह अपने आदेश में कहा कि केंद्र ने एक हलफनामे में कहा है कि अब वह अग्निपथ योजना के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना में अविवाहित पुरुष एवं महिला उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है, ऐसे में इसमें किसी अदालती आदेश की जरूरत नहीं रह जाती है।

याचिकाकर्ता कुश कालरा ने वायुसेना के सभी विभागों में ग्रुप ‘एक्स’ और ‘वाई ’ ट्रेड में ‘एयरमैन’ पद पर केवल अविवाहित पुरुषों की भर्ती पर ऐतराज जताया था।

ग्रुप ‘एक्स’ ट्रेड, विमान एवं ‘ग्राउन्ड सिस्टम’ जैसे तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा होता है, जबकि ग्रुप ‘वाई’ का संबंध साजोसामान (लॉजिस्टक्स) एवं लेखा जैसे गैर तकनीकी क्षेत्रों से होता है।

न्यायमूर्ति शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार की ओर से एक हलफनामा दिया गया और इस अदालत के संज्ञान में लाया गया है कि अग्निपथ योजना के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती के मामले में सरकार द्वारा लिये गये नीतिगत निर्णय के आलोक में भारतीय संघ अविवाहित पुरुष एवं महिला उम्मीदवारों की भर्ती कर रहा है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘ वायुसेना में अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है तथा कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है। उपरोक्त बातों के मद्देनजर वर्तमान जनहित याचिका पर कोई और आदेश जारी करने की जरूरत नहीं रह जाती है।’’
याचिकाकर्ता ने इन दो समूहों में ‘एयरमैन’ की नौकरी के लिए केवल अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने वाला विज्ञापन वायुसेना द्वारा जारी किये जाने के बाद 2018 में अदालत में जनहित याचिका दायर की थी।


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