Edited By Sahil Kumar,Updated: 13 Jan, 2026 09:16 AM

सर्दी के मौसम में डायबिटीज मरीजों के लिए शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। एम्स के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत ने चेतावनी दी है कि ठंड में कम एक्सरसाइज और खानपान में बदलाव से ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है। उन्होंने नियमित जांच, घर में व्यायाम, मीठे से...
नेशनल डेस्कः सर्दी के मौसम में डायबिटीज के मरीजों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस मौसम में शुगर लेवल बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और खानपान में बदलाव आता है, जो ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकता है। एम्स के एंडोक्रोनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत ने बताया कि सर्दियों में आमतौर पर शुगर लेवल बढ़ने की संभावना होती है। खानपान के पैटर्न में बदलाव और ठंड के कारण एक्सरसाइज की कमी के कारण ऐसा होता है। डॉ. खड़गावत ने यह भी कहा कि इस मौसम में डायबिटीज के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
शुगर लेवल की जांच
डायबिटीज के मरीजों के लिए यह जरूरी है कि वे हफ्ते में कम से कम 2-3 बार फास्टिंग और खाने के बाद के शुगर लेवल की जांच जरूर करें। इसके अलावा, घर के अंदर रहकर हल्की एक्सरसाइज जैसे स्ट्रेचिंग, योग या हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए, जो शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है।
मीठा खाने से बचें
डॉ. राजेश खड़गावत ने यह भी कहा कि सर्दियों में मीठा खाने की क्रेविंग हो सकती है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को मीठे से परहेज करना चाहिए। मीठा खाने से ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। फास्ट फूड और तली-भूनी चीजों से भी बचना चाहिए और डाइट में प्रोटीन और विटामिन को अधिक शामिल करना चाहिए।
7-8 गिलास गुनगुना पानी
सर्दी के मौसम में लोग पानी कम पीते हैं, लेकिन शरीर को हाइड्रेशन की आवश्यकता बनी रहती है। डॉ. खड़गावत का कहना है कि सर्दियों में भी कम से कम 7-8 गिलास गुनगुना पानी जरूर पीना चाहिए। अगर पानी की खपत कम हो रही हो, तो ग्रीन टी जैसे विकल्प भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं।
दवाइयों में बदलाव न करें
कई डायबिटीज मरीज ठंड के मौसम में दवाइयों की डोज कम या बंद कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। डॉ. राजेश खड़गावत ने चेतावनी दी है कि दवाइयों के डोज में बदलाव खुद से न करें। पहले शुगर लेवल टेस्ट कराएं और उसके बाद डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवाइयों की डोज में बदलाव करें, क्योंकि अपनी मर्जी से डोज कम या ज्यादा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।