Edited By Mansa Devi,Updated: 24 Jan, 2026 02:16 PM

अमेरिका में प्रस्तावित 500% टैरिफ बिल को लेकर भारत की चिंताएं एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के एक बयान ने नया राजनीतिक और आर्थिक विवाद खड़ा कर दिया है।
नेशनल डेस्क: अमेरिका में प्रस्तावित 500% टैरिफ बिल को लेकर भारत की चिंताएं एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के एक बयान ने नया राजनीतिक और आर्थिक विवाद खड़ा कर दिया है। बेसेंट के दावे से संकेत मिलता है कि भारत पर संभावित 500% टैरिफ का खतरा अब टल सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
स्कॉट बेसेंट का दावा: भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया
अमेरिकी संसद में 500% टैरिफ बिल पर चर्चा के दौरान स्कॉट बेसेंट ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि रूस से तेल खरीदने के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। बेसेंट के मुताबिक, इस दबाव के बाद भारत ने रूस से तेल की खरीद पहले कम की और फिर पूरी तरह बंद कर दी। उनके अनुसार, यही ट्रंप की ‘टैरिफ डिप्लोमेसी’ की सफलता है।
500% टैरिफ की जरूरत अब नहीं?
बेसेंट के बयान का निहितार्थ यह है कि जब भारत ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए रूस से दूरी बना ली है, तो फिर 500% टैरिफ जैसे कड़े कदम की जरूरत नहीं रह जाती। ट्रंप प्रशासन की चिंता यह रही है कि भारत और चीन जैसे देश रूस के साथ कारोबार बढ़ाकर डॉलर के वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं और ‘डी-डॉलराइजेशन’ को बढ़ावा दे सकते हैं।
दावे बनाम हकीकत
हालांकि, बेसेंट का यह दावा पूरी तरह तथ्यों पर खरा नहीं उतरता। ऊर्जा बाजार के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं की है। डेटा एनालिटिक्स कंपनी केप्लर (Kpler) के मुताबिक, इस महीने के पहले पखवाड़े में भारत ने रूस से औसतन 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया है।
खरीद में कमी, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं
यह जरूर है कि रूस से तेल आयात में कमी आई है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, यह मात्रा पिछले साल की इसी अवधि और 2025 के औसत से करीब 30% कम है। दिसंबर के मुकाबले भी आयात में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करना कहना सही नहीं होगा।
आगे क्या?
अगर अमेरिका यह मानकर चल रहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, तो संभव है कि 500% टैरिफ वाला प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में चला जाए। लेकिन अगर वास्तविक आंकड़ों को आधार बनाया गया, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में यह मुद्दा आगे भी तनाव का कारण बन सकता है।