Edited By ,Updated: 09 Jan, 2026 03:59 AM

नए साल के शुरू में वेनेजुएला पर अमरीकी हमला और राष्ट्रपति मादुरो को पत्नी समेत उठा ले जाना विश्व शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरे का ही इशारा है। सभ्य समाज और कानून सम्मत व्यवस्था में कल्पना से भी परे होना चाहिए कि एक देश दूसरे देश पर हमला कर उसके...
नए साल के शुरू में वेनेजुएला पर अमरीकी हमला और राष्ट्रपति मादुरो को पत्नी समेत उठा ले जाना विश्व शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरे का ही इशारा है। सभ्य समाज और कानून सम्मत व्यवस्था में कल्पना से भी परे होना चाहिए कि एक देश दूसरे देश पर हमला कर उसके राष्ट्रपति को इस तरह पत्नी समेत उठा ले जाए, लेकिन 21वीं शताब्दी में यह होते हुए पूरी दुनिया ने देखा। इसके बावजूद अधिकांश देशों की प्रतिक्रिया निजी हानि-लाभ से प्रेरित है तो समझना मुश्किल नहीं कि हम तेजी से ‘जंगल राज’ की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें ‘जिसकी लाठी, उसी की भैंस’ होती है।
बेशक विश्व व्यवस्था में ताजा उथल-पुथल का कारण बने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर ड्रग्स तस्करी में संलिप्तता समेत कई तरह के आरोप लगाते रहे हैं लेकिन अंतर्राष्ट्रीय कानून इस तरह किसी संप्रभु देश पर हमला करने की छूट दूसरे देश को नहीं देते। ट्रम्प का दावा है कि मादुरो की गिरफ्तारी के साथ ही समुद्री रास्ते से ड्रग तस्करी के 97 प्रतिशत मामलों को खत्म कर दिया गया है। बकौल ट्रम्प, ड्रग तस्करी करने वाली हर नाव औसतन 25 हजार लोगों को मारती है लेकिन कोई विश्वसनीय अध्ययन इसकी पुष्टि नहीं करता कि सबसे ज्यादा तस्करी वेनेजुएला से होती है।
फिर तस्करी रोकने के बहुत सारे उपाय हैं। अपनी सीमाओं पर चौकसी चाक-चौबंद करने की बजाय जिस देश से कथित रूप से तस्करी हो रही हो, उस पर हमला और उसके राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार कर लेना भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है। अगर रूस इसी तरह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को उठा ले या फिर चीन भी ताईवान पर हमला कर ऐसा ही करे, तब क्या विश्व व्यवस्था नाम की कोई चीज रह जाएगी? राजधानी कराकास पर हमले के बाद मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को आतंकवादरोधी अमरीकी बल ‘डेल्टा फोर्स’ जिस तरह बैडरूम से घसीटता हुआ ले गया, वह किसी अंडरवल्र्ड गैंग की कार्रवाई ज्यादा लगती है। बेहद खौफनाक एवं असुरक्षित मैट्रोपोलिटन डिटैंशन सैंटर में रखे गए मादुरो पर नार्को टैररिज्म आदि के लिए अमरीका में मुकद्दमा चलाया जाना भी कई सवाल खड़े करता है। अमरीका ‘दुनिया का चौधरी’ नहीं है। ऐसे मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय बेहतर मंच हैं।
क्यूबा से ले कर अफगानिस्तान और इराक तक अनेक उदाहरण हैं, जब अमरीका ने आरोपों और आशंकाओं के जरिए माहौल बना कर संप्रभु देशों पर हमले करते हुए उन्हें तबाह कर दिया। सोवियत संघ समॢथत नजीबुल्लाह सरकार को हटाने के लिए अमरीका ने पहले तो पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान में आतंकवादी तालिबान तैयार किए और फिर उन्हीं के खात्मे के नाम पर वहां हमला भी कर दिया। आज अफगानिस्तान बिखरा हुआ बर्बाद मुल्क है। खतरनाक जन संहारक हथियार होने के आरोप लगाते हुए अमरीका ने विश्व शांति और सुरक्षा के नाम पर इराक पर हमला किया और बिना पारदर्शी अदालती कार्रवाई के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को समंदर में दफन कर दिया। इराक के पास बताए गए जन संहारक हथियारों की बाबत दुनिया को आज तक कुछ पता नहीं चला, पर तेल आदि संसाधनों से समृद्ध देश इराक बर्बाद हो गया।
तेल बेच कर मुनाफा कमाने का ट्रम्प का बयान भी चर्चा में है। बेशक बस ड्राइवर से वर्कर्स यूनियन नेता और फिर वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने वाले मादुरो संत नहीं हैं, पर अपना नेता और नियति चुनने का अधिकार तो सिर्फ वेनेजुएला के नागरिकों को होना चाहिए। ट्रम्प के पहले कार्यकाल से ही मादुरो अमरीका के निशाने पर रहे हैं। 2020 में ही मादुरो और उनके करीबियों पर आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी, मनी लांङ्क्षड्रग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अमरीका ने गिरफ्तारी पर डेढ़ करोड़ डॉलर का ईनाम घोषित किया था। ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर ईनाम राशि बढ़ा कर 5 करोड़ कर दी गई।
ट्रम्प के पूर्ववर्ती राष्ट्रपति भी दबंगई दिखाते रहे हैं, पर अपने-अपने हितों से प्रेरित अन्य देश विश्व व्यवस्था को दूरगामी आशंकित खतरे के प्रति उस कबूतर की तरह आचरण कर रहे हैं, जो बिल्ली को देख कर अपनी आंखें बंद कर खुद को सुरक्षित समझ लेता है। दूसरी बार राष्ट्रपति बनते ही ट्रम्प ने दुनिया में जो ‘टैरिफ वॉर’ छेड़ी, वह दबंगई का ही संकेत था, पर एकजुट हो कर प्रतिकार करने की बजाय देश अपने-अपने समझौते की राह खोजने में लगे रहे।
वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने उप राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया है, पर ट्रम्प अपनी खास टीम के जरिए वेनेजुएला को चलाना चाहते हैं। यह औपनिवेशिक सोच है, जिसका विरोध करने का ऐलान वेनेजुएला के नागरिकों ने किया है। वेनेजुएला का भविष्य उसके नागरिकों की संघर्ष क्षमता पर निर्भर करेगा लेकिन किसी संप्रभु देश पर इस तरह हमले पर शेष विश्व का मूकदर्शक बने रहना बड़े खतरे को मौन निमंत्रण साबित हो सकता है। क्यूबा, कोलम्बिया और मैक्सिको को भी ट्रम्प धमकी दे ही रहे हैं। ग्रीनलैंड में तो डर साफ नजर आने लगा है।-राज कुमार सिंह