Edited By jyoti choudhary,Updated: 29 Jan, 2026 04:58 PM

चांदी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। एमसीएक्स पर यह पहली बार 4 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। हालांकि, इस तेज उछाल को लेकर WhiteOak Mutual Fund की एक रिपोर्ट में चांदी की इस तेजी से कुछ चिंताएं भी पैदा कर दी...
बिजनेस डेस्कः चांदी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। एमसीएक्स पर यह पहली बार 4 लाख रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। हालांकि, इस तेज उछाल को लेकर WhiteOak Mutual Fund की एक रिपोर्ट में चांदी की इस तेजी से कुछ चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। फंड हाउस का कहना है कि चांदी की मौजूदा तेजी जरूरत से ज्यादा तेज और सट्टेबाजी से प्रेरित दिख रही है, जो आगे चलकर बड़े करेक्शन का खतरा पैदा कर सकती है।
चांदी को 2 लाख से 4 लाख रुपए तक पहुंचने में दो महीने का भी समय नहीं लगा है। यह मात्र 10 दिनों में 3 लाख से 4 लाख रुपए तक पहुंच गई। व्हाइटओक म्यूचुअल फंड ने 'गोल्ड इज टॉकिंग, सिल्वर इज स्क्रीमिंग: ए केस फॉर प्रूडेंट रीपोजिशनिंग' (Gold is Talking, Silver is Screaming: A Case for Prudent Repositioning) नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय सोना और चांदी की कीमतें एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां पोर्टफोलियो की रणनीति के लिए दोनों धातुओं के बीच का अंतर पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
क्या संकेत दे रहे सोना और चांदी?
यह रिपोर्ट कहती है कि सोना और चांदी बहुत अलग संकेत दे रहे हैं। सोने का बढ़ना मैक्रोइकॉनॉमिक यानी व्यापक आर्थिक तनाव को दर्शाता है। इसमें मुद्रा का कमजोर होना, भू-राजनीतिक जोखिम और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताएं शामिल हैं। वहीं, चांदी की तेज उछाल औद्योगिक मांग के साथ-साथ सट्टेबाजी की बढ़ी हुई गतिविधि की ओर इशारा करती है। व्हाइटओक का कहना है कि भले ही दोनों धातुओं को अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने का फायदा मिला है लेकिन चांदी के भाव में तेजी का पैटर्न बहुत ज्यादा पैराबोलिक (parabolic) हो गया है, जो ऐतिहासिक रूप से अस्थिरता से पहले देखा जाता है।
क्या चांदी में आएगी गिरावट?
रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि सोना एक मोमेंटम ट्रेड यानी तेजी से लाभ कमाने का सौदा बनने के बजाय पोर्टफोलियो के लिए बीमा (इंश्योरेंस) की तरह काम कर रहा है। इसकी ताकत महंगाई, वित्तीय अस्थिरता और शेयर बाजार में तनाव के समय में खरीदने की क्षमता को बनाए रखना है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, स्थिर निवेश मांग और सोने की एक मौद्रिक संपत्ति के रूप में भूमिका ने इसकी तेजी को सहारा दिया है। व्हाइटओक की रिपोर्ट बताती है कि पिछले चक्रों में भी, चांदी की तुलना में सोने में गिरावट कम गहरी रही है और रिकवरी की अवधि छोटी रही है।
इसके विपरीत, चांदी एक अधिक जटिल स्थिति में है। एक कीमती धातु और औद्योगिक धातु होने के नाते, इसकी कीमत मैक्रो अनिश्चितताओं के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों से होने वाली मांग से प्रभावित होती है। व्हाइटओक की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि जहां यह दोहरी मांग तेजी के दौरान लाभ को बढ़ा सकती है, वहीं यह गिरावट के जोखिम को भी बढ़ा देती है। ऐतिहासिक रूप से, सट्टेबाजी के चरम के बाद चांदी में 40 से 55% तक की गिरावट देखी गई है और इसे ठीक होने में कई साल लग जाते हैं। चांदी का मार्केट स्ट्रक्चर कमजोर होने के कारण यह सट्टेबाजी की पोजीशन के हटने पर तेज उलटफेर के प्रति अधिक संवेदनशील है।
क्या करें निवेशक?
व्हाइटओक म्यूचुअल फंड कीमती धातुओं को पूरी तरह से छोड़ने की वकालत नहीं करता है। इसके बजाय, रिपोर्ट समझदारी से पुन: व्यवस्थित करने की सलाह देती है। इसमें तेज लाभ के बाद चांदी की हिस्सेदारी कम करना और कीमती धातुओं के समग्र आवंटन को तटस्थ 'बीमा' स्तर पर वापस लाना शामिल है। अधिकांश निवेशकों के लिए, धातुओं के आवंटन में सोना मुख्य होल्डिंग बना रहना चाहिए, जबकि चांदी को एक 'बाय-एंड-होल्ड' संपत्ति के बजाय एक सामरिक एक्सपोजर के रूप में माना जाना चाहिए।