अमेरिकी दबाव बेअसर, भारत को लगातार मिल रहा है सस्ता रूसी तेल

Edited By Updated: 04 Aug, 2025 05:54 PM

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अमेरिका के कड़े रुख और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी के बावजूद भारत में रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। सप्ताहांत के दौरान कम से कम चार टैंकरों ने भारतीय बंदरगाहों पर लाखों बैरल रूसी कच्चा तेल उतारा, जिससे साफ है कि भारत...

बिजनेस डेस्कः अमेरिका के कड़े रुख और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी के बावजूद भारत में रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। सप्ताहांत के दौरान कम से कम चार टैंकरों ने भारतीय बंदरगाहों पर लाखों बैरल रूसी कच्चा तेल उतारा, जिससे साफ है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह किए बिना रूस से ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखे हुए है।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक भारत सरकार ने रिफाइनरियों—चाहे वे निजी हों या सार्वजनिक—को रूस से तेल आयात पर रोक लगाने के कोई निर्देश नहीं दिए हैं। नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज को 'अकीलिस', 'एलेट' और 'होरे' नामक तीन अफ्रामैक्स टैंकरों के ज़रिए करीब 2.2 मिलियन बैरल 'यूरल्स' ग्रेड कच्चा तेल पहुंचाया गया। वहीं 'मिकाती' टैंकर ने लगभग 7.2 लाख बैरल ‘वरांदेय’ ग्रेड तेल कोच्चि (बीपीसीएल) और मंगलूर (एमआरपीएल) में उतारा।

इसके अलावा आने वाले घंटों में दो और टैंकर—‘मिनियन’ और ‘डेस्टन’—रिलायंस के सिका टर्मिनल पर 2.2 मिलियन बैरल तेल के साथ पहुंचने वाले हैं। 'अल्देबर्न' नामक एक अन्य टैंकर मुंद्रा पोर्ट (जहां IOC और HPCL-मित्तल एनर्जी की सुविधाएं हैं) पर कच्चा तेल उतारेगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज रूस के 'यूरल्स' ग्रेड कच्चे तेल की सबसे बड़ी भारतीय खरीदार बनी हुई है और उसका रूसी कंपनी रोसनैफ्ट के साथ दीर्घकालिक अनुबंध है। वहीं भारत, अब भी रूस का सबसे बड़ा समुद्री मार्ग से कच्चा तेल आयात करने वाला देश बना हुआ है, जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई है।

हाल ही में यूरोपीय संघ ने नायरा एनर्जी पर रूस से कारोबारी संबंधों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे, जिससे कंपनी की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा। हालांकि, भारतीय रिफाइनरियों ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है और वे फिलहाल सस्ते रूसी तेल के आयात को जारी रखे हुए हैं।

ट्रंप प्रशासन की चेतावनियों और अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद भी भारत का यह रुख दोनों देशों के बीच संबंधों में नई जटिलताएं पैदा कर सकता है।

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