Gold Loans Records: सोने की रिकॉर्ड तेजी के बीच Gold Loan में जबरदस्त उछाल

Edited By Updated: 02 Jan, 2026 12:24 PM

amidst record breaking gold prices gold loans have seen a massive surge

पिछले साल सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी का असर अब बैंकिंग सेक्टर में साफ नजर आने लगा है। नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 125 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह रफ्तार बैंकों के कुल लोन में हुई 11.5 फीसदी की ग्रोथ से करीब दस...

बिजनेस डेस्कः पिछले साल सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी का असर अब बैंकिंग सेक्टर में साफ नजर आने लगा है। नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 125 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह रफ्तार बैंकों के कुल लोन में हुई 11.5 फीसदी की ग्रोथ से करीब दस गुना ज्यादा है। इससे पहले भी साल 2024 में गोल्ड लोन में 77 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई थी।

हालांकि कुल बैंक लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी अभी भी 2 फीसदी से कम है लेकिन इसका आकार करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि नवंबर 2025 तक दिए गए नए कर्जों में गोल्ड लोन का योगदान करीब 12 फीसदी रहा।

12 महीनों में 1.5 लाख करोड़ का इजाफा

पिछले 12 महीनों में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। बैंकों के मुताबिक इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, बैंक अब सुरक्षित कर्ज देने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दूसरा, सोने की कीमतों में भारी उछाल से लोगों की कर्ज लेने की क्षमता बढ़ी है। तीसरा, RBI के निर्देशों के बाद कुछ रिटेल लोन को अब गोल्ड लोन की श्रेणी में शामिल किया जा रहा है।

गोल्ड लोन और MSME बने ग्रोथ के इंजन

बैंकों के लोन ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान गोल्ड लोन और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) लोन का रहा है। MSME सेक्टर का कुल बकाया लोन करीब 9.5 लाख करोड़ रुपए है, जो कुल बैंक लोन का लगभग 5 फीसदी है लेकिन नए कर्जों में इनकी हिस्सेदारी भी करीब 12 फीसदी रही, जिसमें FY26 के दौरान लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि बैंक और ग्राहक दोनों ही अब सुरक्षित और छोटे टिकट साइज वाले कर्जों की ओर झुक रहे हैं।

बड़ी कंपनियों से दूरी, बिना गारंटी लोन पर सतर्कता

दूसरी ओर, बड़ी कंपनियों का बैंक लोन लेने का रुझान कमजोर पड़ता दिख रहा है। बड़ी कंपनियों का कुल बकाया लोन 28.7 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल लोन का 15 फीसदी है लेकिन नए कर्जों में इनका हिस्सा महज 3.6 फीसदी रहा। इसमें केवल 46,090 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी कंपनियां या तो अपने पुराने कर्ज चुका रही हैं या बॉन्ड मार्केट और आंतरिक संसाधनों से फंड जुटा रही हैं।

होम लोन की रफ्तार भी हुई धीमी

व्यक्तिगत कर्जों में होम लोन की ग्रोथ भी कुछ धीमी पड़ी है। होम लोन कुल बकाया लोन का 16 फीसदी हैं, लेकिन नए कर्जों में इनकी हिस्सेदारी घटकर 14 फीसदी रह गई है। वहीं कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले लोन नए कर्जों का सिर्फ 6 फीसदी ही रहे।

आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर फोकस

कुल मिलाकर, व्यक्तिगत लोन नए कर्जों का करीब 40 फीसदी हिस्सा बने हुए हैं। सर्विस सेक्टर में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें NBFCs और ट्रेड से जुड़े लोन का बड़ा योगदान है। नवंबर 2025 तक कुल बैंक लोन बढ़कर 195.2 लाख करोड़ रुपए हो गया।

ये रुझान साफ संकेत देते हैं कि बैंक अब बड़ी कंपनियों के बजाय आम लोगों और छोटे कारोबारियों को ज्यादा कर्ज दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव बैंकों की कमाई के साथ-साथ जोखिम प्रोफाइल को भी प्रभावित कर सकता है।
 

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