Edited By jyoti choudhary,Updated: 15 Jan, 2026 04:56 PM

स्वच्छ ईंधन से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वर्ष 2030 तक निवेश को चार गुना कर सालाना 100 अरब डॉलर पर ले जाने की जरूरत होगी। बृहस्पतिवार को एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की अगले हफ्ते दावोस में...
नई दिल्लीः स्वच्छ ईंधन से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए वर्ष 2030 तक निवेश को चार गुना कर सालाना 100 अरब डॉलर पर ले जाने की जरूरत होगी। बृहस्पतिवार को एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की अगले हफ्ते दावोस में शुरू होने वाली वार्षिक बैठक से पहले जारी यह रिपोर्ट कहती है कि स्वच्छ ईंधन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक ईंधन की तुलना में स्वच्छ ईंधन क्षेत्र दो से तीन गुना ज्यादा नौकरियां पैदा कर सकता है और देशों की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विविध बना सकता है। स्वच्छ ईंधन के तहत जैव ईंधन, हाइड्रोजन आधारित ईंधन और कम कार्बन वाले जीवाश्म ईंधन शामिल हैं। ये ईंधन परिवहन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में उत्सर्जन घटाने में मददगार हैं। फिलहाल तरल और गैसीय ईंधन दुनिया की कुल ऊर्जा जरूरतों का 56 प्रतिशत हिस्सा पूरा करते हैं। हालांकि अभी स्वच्छ ईंधन में निवेश का अनुपात स्वच्छ ऊर्जा निवेश के एक प्रतिशत से थोड़ा ही अधिक है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर निवेश की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो तय लक्ष्य पूरे नहीं हो पाएंगे। इस समय दुनिया भर में स्वच्छ ईंधन क्षेत्र में सालाना करीब 25 अरब डॉलर का निवेश हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, "स्वच्छ ईंधन के लिए मजबूत संभावनाएं हैं, लेकिन बड़े लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए हकीकत को समझते हुए ठोस और निवेश-योग्य परियोजनाएं बनानी होंगी। वैश्विक स्वच्छ ईंधन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2030 तक कम-से-कम 100 अरब डॉलर सालाना निवेश जरूरी होगा।"
डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट कहती है कि स्वच्छ ईंधन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में शुरुआती लागत अधिक होने, मांग को लेकर अनिश्चितता और नीतिगत असमानता जैसी चुनौतियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए सरकार, उद्योग और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट नीतियों की जरूरत होगी। इस श्वेत-पत्र को बैन एंड कंपनी के सहयोग से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में ऐसे नीतिगत, कारोबारी और वित्तीय उपायों का खाका पेश किया गया है जो वैश्विक लक्ष्यों को भरोसेमंद और आर्थिक रूप से टिकाऊ परियोजनाओं में बदल सकता है।