रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारतीयों ने चॉकलेट, जेम और मीठे उत्पाद पर 6.60 लाख करोड़ खर्च किए

Edited By Updated: 17 Jun, 2025 12:13 PM

big disclosure in the report indians spent 6 60 lakh crores on chocolates

देश में समय के साथ लोगों की जीवनशैली और उपभोक्ता आदतों में बड़ा बदलाव आया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की ताज़ा रिपोर्ट इस बदलाव की गवाही दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में भारतीयों ने चॉकलेट, जेम और चीनी जैसे मीठे...

बिजनेस डेस्कः देश में समय के साथ लोगों की जीवनशैली और उपभोक्ता आदतों में बड़ा बदलाव आया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की ताज़ा रिपोर्ट इस बदलाव की गवाही दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में भारतीयों ने चॉकलेट, जेम और चीनी जैसे मीठे उत्पादों पर 6.60 लाख करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि सब्जियों पर 5.95 लाख करोड़ और तेल व वसा जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों पर केवल 2.45 लाख करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।

तेल और वसा पर खर्च में गिरावट

CMIE के अनुसार, पिछले एक साल में तेल और वसा पर खर्च में 19.67% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, दूसरी ओर चॉकलेट पर खर्च में 19.78% की बढ़त देखी गई है। यह ट्रेंड उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में हो रहे बदलाव की ओर इशारा करता है।

बीते चार वर्षों में खर्च का आंकड़ा

2023-24:

  • चॉकलेट, जेम, चीनी: ₹6.60 लाख करोड़
  • सब्जियां: ₹5.95 लाख करोड़
  • तेल वसा: ₹2.45 लाख करोड़

2022-23:

  • चॉकलेट, जेम, चीनी: ₹5.51 लाख करोड़
  • सब्जियां: ₹5.28 लाख करोड़
  • तेल वसा: ₹3.05 लाख करोड़

2021-22:

  • चॉकलेट, जेम, चीनी: ₹4.71 लाख करोड़
  • सब्जियां: ₹5.06 लाख करोड़
  • तेल वसा: ₹2.76 लाख करोड़

2020-21:

  • चॉकलेट, जेम, चीनी: ₹4.46 लाख करोड़
  • सब्जियां: ₹4.79 लाख करोड़
  • तेल वसा: ₹2.01 लाख करोड़

स्वास्थ्य और कुल उपभोक्ता खर्च में भी इजाफा

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी खर्च में 18.75% की बढ़त हुई है। वहीं, कुल उपभोक्ता खर्च 9.72% बढ़कर 181.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

क्या कहता है यह ट्रेंड?

यह डेटा साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत में उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। लोग अब पारंपरिक जरूरतों की तुलना में ज्यादा खर्च आरामदायक या स्वाद संबंधी वस्तुओं पर कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव शहरीकरण, आय में वृद्धि और जीवनशैली में आए बदलावों का नतीजा है। 
 

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