Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Aug, 2026 12:23 PM

UPI Payment Charge: UPI से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाले हैं। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव के तहत Zero MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की व्यवस्था खत्म की जा सकती है। सरकार को
UPI Payment Charge: UPI से जुड़े नियमों में बदलाव होने वाले हैं। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव के तहत Zero MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की व्यवस्था खत्म की जा सकती है। सरकार को भविष्य में जरूरत पड़ने पर UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल ग्राहकों के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा सीधा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन का मतलब UPI यूजर्स से अतिरिक्त चार्ज वसूलना नहीं है। यदि भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है, तो इसका असर मुख्य रूप से कारोबारियों (मर्चेंट्स) पर पड़ सकता है। अंतिम फैसला संशोधन विधेयक पारित होने और सरकार की अधिसूचना के बाद ही होगा।
क्या है सरकार की योजना?
प्रस्ताव के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A को हटाने की बात कही गई है। वर्तमान में यही धारा UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लगाने से रोकती है। यदि यह प्रावधान हटता है, तो सरकार बाद में अधिसूचना जारी कर यह तय कर सकेगी कि किन लेनदेन पर MDR लागू होगा और उसकी दर कितनी होगी।
क्या है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले व्यापारी बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को देते हैं। व्यापारी चाहें तो इस लागत को खुद वहन करें या सामान की कीमत में शामिल करें। यह पूरी तरह उनका व्यावसायिक निर्णय होता है।
MDR क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं। जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर Zero MDR लागू है, जिसके कारण कारोबारियों को भुगतान की पूरी राशि मिलती है।
Zero MDR पर पुनर्विचार क्यों?
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा UPI के जरिए होता है। हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने में बैंकों और पेमेंट कंपनियों की लागत लगातार बढ़ रही है। समिति का मानना है कि लंबे समय तक Zero MDR व्यवस्था बनाए रखना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए सरकार भविष्य के लिए कानूनी विकल्प तैयार करना चाहती है।
उद्योग की क्या मांग है?
डिजिटल पेमेंट उद्योग लंबे समय से Zero MDR नीति पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नेटवर्क संचालन और विस्तार की वास्तविक लागत की तुलना में काफी कम है। कुछ संगठनों ने बड़े कारोबारियों पर सीमित MDR लगाने और छोटे कारोबारियों को छूट देने का सुझाव भी दिया है।