Credit Card से लेकर चांदी की हॉलमार्किंग...1 सितंबर से बदलेंगे कई नियम, जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Edited By Updated: 28 Aug, 2025 01:17 PM

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हर महीने की पहली तारीख कुछ नई शुरुआत और बदलाव लेकर आती है। इस बार 1 सितंबर 2025 से भी कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। इनमें चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग, एसबीआई क्रेडिट कार्ड पर नए चार्ज और डाक विभाग की...

बिजनेस डेस्कः हर महीने की पहली तारीख कुछ नई शुरुआत और बदलाव लेकर आती है। इस बार 1 सितंबर 2025 से भी कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। इनमें चांदी की अनिवार्य हॉलमार्किंग, एसबीआई क्रेडिट कार्ड पर नए चार्ज और डाक विभाग की रजिस्ट्री सेवा का स्पीड पोस्ट में विलय जैसे नियम शामिल हैं।

SBI क्रेडिट कार्ड के नए चार्ज

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपने क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब यदि आपके कार्ड का ऑटो-डेबिट असफल होता है, तो 2% पेनल्टी देनी होगी। इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन, फ्यूल और ऑनलाइन शॉपिंग पर भी अतिरिक्त चार्ज लग सकते हैं। साथ ही, रिवॉर्ड पॉइंट्स की वैल्यू घट सकती है और कार्ड प्रोटेक्शन प्लान भी बदलेंगे। 16 सितंबर 2025 से सभी ग्राहकों को नए वेरिएंट में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

अब चांदी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य

1 सितंबर से चांदी के गहनों और सिक्कों पर भी हॉलमार्किंग जरूरी होगी। अभी तक यह नियम केवल सोने पर लागू था। इससे ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिलेगी, हालांकि ज्वैलर्स का मानना है कि इससे चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

रजिस्ट्री का स्पीड पोस्ट में विलय

डाक विभाग ने बड़ा बदलाव करते हुए रजिस्टर्ड पोस्ट को स्पीड पोस्ट का हिस्सा बना दिया है। अब 1 सितंबर से कोई भी रजिस्ट्री सीधे स्पीड पोस्ट सेवा से जाएगी। इससे प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी।

FD की ब्याज दरों में कटौती की आशंका

सितंबर में कई बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों की समीक्षा करेंगे। मौजूदा समय में ये दरें 6.5% से 7.5% के बीच हैं। आशंका है कि जल्द इनमें कटौती हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को ऊंची ब्याज दर का फायदा पाने के लिए जल्द एफडी कराने की सलाह दी जा रही है।

GST परिषद की बैठक

3-4 सितंबर 2025 को जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक होगी। इसमें टैक्स दरों को घटाकर मौजूदा चार स्लैब की जगह दो स्लैब (5% और 12%) करने का प्रस्ताव चर्चा में रह सकता है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर पड़ेगा।

 

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