Gold Price Outlook: रिकॉर्ड तेजी के बाद फिसले सोना-चांदी, एक्सपर्ट्स ने दी निवेशकों को अहम सलाह

Edited By Updated: 27 Jul, 2026 12:52 PM

gold and silver prices slip after record surge experts advice

साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोना और चांदी अब अपने हाई लेवल से काफी नीचे आ चुके हैं। कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कीमती धातुओं में फिर से बड़ी तेजी लौटेगी या अभी लंबा इंतजार करना...

बिजनेस डेस्कः साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाले सोना और चांदी अब अपने हाई लेवल से काफी नीचे आ चुके हैं। कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कीमती धातुओं में फिर से बड़ी तेजी लौटेगी या अभी लंबा इंतजार करना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोना-चांदी सीमित दायरे में रह सकते हैं और निवेशकों को त्वरित मुनाफे की बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए। हालांकि, ब्याज दरों में संभावित कटौती और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव भविष्य में इन धातुओं को फिर से सहारा दे सकते हैं।

तेजी के बाद आई बड़ी गिरावट

जनवरी 2026 में सोने की कीमत 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर थी। हालांकि इसके बाद इसमें करीब 28 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। हाल के दिनों में कीमत दो बार 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसली और फिलहाल 4,098 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है। तब जनवरी में भारत में इसकी कीमत करीब 1 लाख 80 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के पीक लेवल पर पहुंच गई थी। हालांकि, अब सोने का भाव 1.44 लाख रुपए पर आ गया है। सोने का भाव अपने पीक लेवल से 36,000 रुपए कम हो चुका है। पिछले कुछ महीनों से सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। 

गिरावट की वजह क्या रही?

विशेषज्ञों के अनुसार सोने और चांदी में आई तेजी सिर्फ सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सट्टेबाजी का भी बड़ा योगदान था। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें उछलीं, जिससे महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंका बढ़ गई।

इसी दौरान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स मजबूत हुए, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने का आकर्षण घटा। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी पर औद्योगिक मांग में नरमी का भी असर पड़ा, क्योंकि यह कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग में भी आती है।

क्या फिर आएगी बड़ी तेजी?

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में सोना और चांदी में पहले जैसी तेज रैली की संभावना कम है। फिलहाल दोनों धातुएं सीमित दायरे (Range-bound) में कारोबार कर सकती हैं। ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक निवेश चक्र सोने की तेजी को कुछ समय तक सीमित रख सकते हैं।

हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होती है और वास्तविक ब्याज दरें घटती हैं, तो सोने को फिर से सहारा मिल सकता है लेकिन अगली तेजी मजबूत आर्थिक और मौलिक कारकों पर आधारित होगी, न कि केवल निवेशकों की भावनाओं पर।

 

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