सोने के बदले कर्ज का आकार मार्च, 2028 तक ₹30 लाख करोड़ होने का अनुमान

Edited By Updated: 29 Jul, 2026 06:15 PM

gold backed loan market projected reach 30 lakh crore

कर्जदाताओं में सोने के बदले कर्ज (गोल्ड लोन) देने की दिलचस्पी बढ़ने से इस तरह के ऋण का कुल आकार मार्च, 2028 तक बढ़कर 30 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो मार्च, 2026 में 18 लाख करोड़ रुपए था। इक्रा ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान

नई दिल्लीः कर्जदाताओं में सोने के बदले कर्ज (गोल्ड लोन) देने की दिलचस्पी बढ़ने से इस तरह के ऋण का कुल आकार मार्च, 2028 तक बढ़कर 30 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो मार्च, 2026 में 18 लाख करोड़ रुपए था। इक्रा ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा रेटिंग्स ने कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) इस क्षेत्र में बैंकों से तेज वृद्धि दर्ज करती रहेंगी। वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक कुल बकाया पोर्टफोलियो में एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़कर 23 प्रतिशत हो सकती है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 22 प्रतिशत थी। 

एजेंसी ने कहा कि 2026-27 से 2027-28 के दौरान एनबीएफसी के गोल्ड लोन कारोबार में सालाना 35 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने का अनुमान है, जबकि बैंकों के लिए यह दर करीब 30 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उनकी आय पर कुछ दबाव पड़ सकता है। पिछले दो वित्त वर्षों (मार्च 2026 तक) में गोल्ड लोन में औसतन 38 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें बैंकों की वृद्धि 35 प्रतिशत और एनबीएफसी की 54 प्रतिशत रही। 

इक्रा रेटिंग्स के क्षेत्र प्रमुख आर. श्रीनिवासन ने कहा, ''नई फर्मों और बड़ी एनबीएफसी कंपनियों के इस खंड में कदम रखने और शाखा नेटवर्क के विस्तार की योजनाएं, इस क्षेत्र में मजबूत वृद्धि का समर्थन कर रही हैं। बिना गारंटी वाले कर्ज में हाल के दबाव के बीच भी गोल्ड लोन की मांग बनी हुई है।'' रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, वृद्धि का मुख्य कारण खुदरा गोल्ड लोन है, जिसे एनबीएफसी आमतौर पर उपभोग और छोटे व्यवसाय के लिए देते हैं। मार्च, 2026 तक एनबीएफसी की गोल्ड लोन प्रबंधनाधीन संपत्तियां (एयूएम) करीब चार लाख करोड़ रुपए थीं। 

बैंकों में भी खुदरा गोल्ड लोन में तेज बढ़ोतरी देखी गई, जबकि कृषि और अन्य उपयोग के लिए दिए जाने वाले गोल्ड लोन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एजेंसी ने कहा कि कुछ वृद्धि ऋणों के पुनर्वर्गीकरण और नई मांग दोनों के कारण हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में सोने की ऊंची कीमतों के कारण कर्ज का आकार बढ़ रहा है, जबकि गिरवी रखे गए सोने की मात्रा में उतनी वृद्धि नहीं हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान बड़े कर्जदाताओं के ऋण में 24 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले गिरवी सोने की मात्रा केवल तीन-चार प्रतिशत ही बढ़ी। 

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