Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Aug, 2026 03:57 PM

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में कार्य अनुबंध और निर्माण क्षेत्र में जी.एस.टी. अनुपालन से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1,334 मामलों में कुल 401.42 करोड़ रुपए के गोलमाल का पता चला है।
नई दिल्लीः नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में कार्य अनुबंध और निर्माण क्षेत्र में जी.एस.टी. अनुपालन से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1,334 मामलों में कुल 401.42 करोड़ रुपए के गोलमाल का पता चला है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सी.बी.आई.सी.) ने चूक को मानते हुए कहा कि इनमें से 903 मामलों में 268.36 करोड़ रुपए की आपत्तियों को स्वीकार किया गया है और अब तक 15.88 करोड़ रुपए की वसूली की गई है।
850 करदाताओं और 71 कार्यालयों की जांच
मार्च 2024 में समाप्त अवधि से संबंधित कैग की रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई। ऑडिट के दौरान 850 करदाताओं और जी.एस.टी. विभाग के 71 कार्यालयों के रिटर्न तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के रिकॉर्ड देखे गए, जबकि कुछ मामलों में वर्ष 2023-24 तक की स्थिति की भी जांच की गई।
रियायतों और इनपुट टैक्स क्रैडिट में गड़बड़ी
ऑडिट में सड़कों, पुलों, रेलवे तथा मिट्टी के काम से जुड़े अनुबंधों पर गलत तरीके से रियायत या छूट लेने, सरकारी संस्थाओं के लिए किए गए कार्यों पर कम कर भुगतान और रिवर्स चार्ज के तहत कम कर जमा करने के मामले सामने आए।
इसके अलावा निर्माण कंपनियों और डिवैलपर्स द्वारा अनुचित इनपुट टैक्स क्रैडिट लेने तथा सेवा कोड और कारोबार के अतिरिक्त स्थानों की सही जानकारी नहीं देने की खामियां भी मिलीं।
123 मामलों में 190.98 करोड़ रुपए का असर
कैग के मुताबिक 123 मामलों में सामने आई अनियमितताओं से राजस्व पर 190.98 करोड़ रुपए का प्रभाव पड़ा। वहीं 522 करदाताओं से जुड़े 1,057 मामलों में 188.98 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कर देनदारी सामने आई।
रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी विभाग विफल
ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में भी गंभीर दिक्कतें सामने आईं। 392 करदाताओं से जुड़े 431 मामलों में जरूरी दस्तावेज पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए। इन मामलों में कर देनदारी, इनपुट टैक्स क्रैडिट और रियायती दरों से संबंधित 2,732.56 करोड़ रुपए का अंतर पाया गया। इसके अलावा 22 मामलों में मूल रिटर्न और अन्य विवरण विभागीय प्रणाली में उपलब्ध नहीं थे।
71 में से 57 कार्यालयों में खामियां
जी.एस.टी. कार्यालयों की निगरानी व्यवस्था पर भी कैग ने सवाल उठाए हैं। जांच के दौरान 71 कार्यालयों में से 57 में कमियां पाई गईं। कई मामलों में जांच समय पर नहीं हुई और जोखिम संबंधी चेतावनियों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
कैग ने दिए सुधार के सुझाव
कैग ने विभाग से निर्माण और कार्य अनुबंधों में रियायत का दावा करने वाले उप-ठेकेदारों की जांच मजबूत करने तथा आंतरिक ऑडिट का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की है। रिवर्स चार्ज वाले मामलों की निगरानी बढ़ाने और आयकर विभाग के साथ बेहतर समन्वय करने पर भी जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय और जी.एस.टी. नैटवर्क ने सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े अधिकांश निष्कर्षों को स्वीकार किया है। कैग ने कहा कि कर संग्रह में वृद्धि के बावजूद निर्माण क्षेत्र में अनुपालन की खामियां और व्यवस्था की कमजोरियां सरकारी राजस्व के लिए जोखिम बनी हुई हैं।