Crude Oil Price: कच्चे तेल में गिरावट से भारत को राहत की उम्मीद, पेट्रोल-डीजल निर्यात टैक्स में भी बदलाव

Edited By Updated: 19 Oct, 2026 01:31 PM

india expects relief from the decline in crude oil prices

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार, 19 अक्टूबर को नरमी देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 1.71% गिरकर 107.98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले 18 अक्टूबर को इसकी कीमत पांच महीने के उच्च

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार, 19 अक्टूबर को नरमी देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 1.71% गिरकर 107.98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले 18 अक्टूबर को इसकी कीमत पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, मौजूदा गिरावट से भारत जैसे तेल आयातक देशों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक तनाव के चलते सप्लाई पर खतरा अभी बना हुआ है।

खाड़ी क्षेत्र में तनाव से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सऊदी अरब के तट के पास फारस की खाड़ी में टैंकरों पर हमलों की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सबकी नजर है, क्योंकि यह दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है।

अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने पिछले एक सप्ताह में इस मार्ग से 10 करोड़ बैरल से अधिक तेल की आवाजाही में मदद की। इससे सप्लाई को लेकर कुछ राहत मिली है लेकिन हमलों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

इस साल 75% से ज्यादा महंगा हुआ ब्रेंट क्रूड

पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस साल ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 75% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हालिया गिरावट के बावजूद तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

पेट्रोल-डीजल के निर्यात टैक्स में बदलाव

सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की दरों में भी बदलाव किया है। पेट्रोल पर निर्यात टैक्स 50 पैसे से बढ़ाकर 2.50 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर इसे 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपए प्रति लीटर किया गया है। नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हैं।

भारत को कितनी राहत मिलेगी?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल और महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, भारतीय क्रूड बास्केट करीब 121 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है, जबकि ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर के आसपास है।

आगे तेल की कीमतें खाड़ी क्षेत्र में तनाव, टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही और रूस-यूक्रेन युद्ध के ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर से तय होंगी। फिलहाल कीमतों में आई नरमी को बड़ी राहत मानना जल्दबाजी होगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को हल्की गिरावट देखने को मिली। 19 अक्टूबर की सुबह करीब 8 बजे दिसंबर डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 1.71 फीसदी की गिरावट के साथ 107.98 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा था। इससे पहले बेंचमार्क क्रूड ने 18 अक्टूबर को 5 महीने का हाई बनाया था। हालांकि, यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है लेकिन खाड़ी देशों में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के तेल में हल्की नरमी थोड़ी राहत जरूर लाई है।

तेल की कीमतों में आई इस नरमी से उन देशों को कुछ राहत मिल सकती है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। इनमें भारत भी शामिल है। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है और रूस के ऊर्जा ठिकानों पर यूक्रेन के हमले दोबारा शुरू होने से तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम बरकरार है।

  

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