Why Gold-Silver Crash: 12 महीने के निचले स्तर पर सोने-चांदी का भाव, अचानक क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

Edited By Updated: 31 Oct, 2026 11:00 AM

gold and silver prices hit a 12 month low why such a sharp decline

कमोडिटी बाजार में अचानक आई भारी बिकवाली से सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। दोनों कीमती धातुओं के भाव 12 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। शुक्रवार रात करीब 8 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की

नई दिल्लीः कमोडिटी बाजार में अचानक आई भारी बिकवाली से सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। दोनों कीमती धातुओं के भाव 12 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। शुक्रवार रात करीब 8 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की दिसंबर फ्यूचर कीमत में करीब 5 फीसदी यानी 10 हजार रुपए से ज्यादा की गिरावट आई। इसके बाद चांदी का भाव 1.79 लाख रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गया।

वहीं, सोने की कीमत भी करीब 3 फीसदी यानी 4,200 रुपए तक गिर गई। MCX पर सोना टूटकर 1,38,250 से 1,38,400 रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ गया। इस गिरावट से लंबे समय से सोने-चांदी की कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे ग्राहकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी धड़ाम

विदेशी बाजारों में भी कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3.3 फीसदी से ज्यादा टूटकर 3,900 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे चला गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत करीब 3,880 डॉलर तक पहुंच गई। वहीं, चांदी में 5.12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 49 से 49.70 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई।

आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने-चांदी में गिरावट की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मुनाफावसूली है। इसके अलावा अमेरिका से आए मजबूत GDP आंकड़ों और महंगाई के दबाव ने भी बाजार की दिशा बदल दी है। मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से सोने पर दबाव बढ़ा है।

इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के सख्त ब्याज दरों से जुड़े संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऊंची ब्याज दरों की आशंका के चलते निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, आगे कीमतों में और गिरावट होगी या बाजार संभलेगा, यह वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगा।
 

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