भारत का अमेरिकी कच्चे तेल का आयात मार्च 2021 के बाद रिकॉर्ड स्तर पर, रूसी तेल में आई गिरावट

Edited By Updated: 04 Nov, 2025 12:39 PM

india s us crude oil imports reached a record high since march 2021

अक्टूबर में भारत का अमेरिकी कच्चे तेल आयात मार्च 2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि रूसी तेल की हिस्सेदारी थोड़ी घटी। केप्लर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अक्टूबर में अमेरिका से औसतन 5.93 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो सितंबर...

बिजनेस डेस्कः अक्टूबर में भारत का अमेरिकी कच्चे तेल आयात मार्च 2021 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि रूसी तेल की हिस्सेदारी थोड़ी घटी। केप्लर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अक्टूबर में अमेरिका से औसतन 5.93 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो सितंबर के 2.07 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं, रूस से आयात 16.1 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 17.3 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है।

विश्लेषकों के मुताबिक, भारत का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। केप्लर के प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, “भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और अमेरिका-रूस के बीच आर्बिट्राज अवसरों ने अक्टूबर में अमेरिकी तेल आयात को बढ़ावा दिया। हालांकि यह वृद्धि स्थायी नहीं, बल्कि अल्पकालिक आर्बिट्राज आधारित है।”

रूस से आने वाले तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अक्टूबर में आपूर्ति सामान्य रही। यह इसलिए क्योंकि भारत को भेजे गए ज्यादातर शिपमेंट अगस्त और सितंबर में बुक किए गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए प्रतिबंध 21 नवंबर से लागू होंगे। ये दोनों कंपनियां भारत के कुल रूसी तेल आयात का करीब 70% हिस्सा हैं।

रितोलिया के मुताबिक, “प्रतिबंध लागू होने से पहले रूसी तेल की आपूर्ति में अस्थायी तेजी देखी गई। लेकिन दिसंबर से जनवरी के बीच आयात में उल्लेखनीय गिरावट संभव है, क्योंकि रिफाइनर नए सप्लायरों और अनुपालन रणनीतियों पर विचार करेंगे।” सरकारी तेल कंपनियां इस समय बिचौलियों के जरिए रूसी तेल की खरीद कर रही हैं, ताकि प्रतिबंधों से सीधे प्रभावित होने से बचा जा सके।

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