Edited By jyoti choudhary,Updated: 19 Mar, 2026 06:15 PM

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंचा दिया है। क्रूड ऑयल के दाम $100 के ऊपर बने हुए हैं और दुनिया में तेल संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच भारत के लिए एक नई चिंता सामने आई है, जो भारतीय करेंसी रुपया (India Rupee) से जुड़ी है।...
बिजनेस डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंचा दिया है। क्रूड ऑयल के दाम $100 के ऊपर बने हुए हैं और दुनिया में तेल संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच भारत के लिए एक नई चिंता सामने आई है, जो भारतीय करेंसी रुपया (India Rupee) से जुड़ी है। गोल्डमैन सैक्स के चीफ इकोनॉमिस्ट संतनु सेनगुप्ता ने चेतावनी दी है कि अगले एक साल में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 तक फिसल सकता है।
रुपया और ग्लोबल टेंशन
सेन्गुप्ता ने एक इंटरव्यू में बताया कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और महंगे क्रूड ऑयल की कीमतें रुपए पर दबाव डाल रही हैं। अगर तेल के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक जा सकता है।
रुपया पहले ही गिर चुका है
बुधवार को भारतीय करेंसी रिकॉर्ड लो पर पहुंच गई थी। रुपया $1 के मुकाबले ₹92.63 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि पिछले सप्ताह यह ₹92.47 तक गिर चुका था।
महंगाई और RBI पर दबाव
संतनु सेनगुप्ता ने चेताया कि रुपए की कमजोरी का असर महंगाई पर भी पड़ेगा। डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये से पेट्रोल, डीजल, ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। इस स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
तेल आयात पर सीधा असर
भारत अपनी कच्ची तेल की जरूरत का करीब 80% विदेशों से आयात करता है। रुपये के कमजोर होने का मतलब है कि तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई पर सीधे असर पड़ेगा।