मारुति सुजुकी ने फिर बढ़ाए वाहनों के दाम, जानें कितनी हुई महंगी

Edited By Updated: 18 Apr, 2022 03:25 PM

maruti suzuki again increased the prices of vehicles

देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने आज यानि 18 अप्रैल से अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा कर दिया है। कंपनी ने कहा कि लागत बढ़ने के चलते हम अपने पूरे मॉडल रेंज की कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। आज से गाड़ियों के...

बिजनेस डेस्कः देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने आज यानि 18 अप्रैल से अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा कर दिया है। कंपनी ने कहा कि लागत बढ़ने के चलते हम अपने पूरे मॉडल रेंज की कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं। आज से गाड़ियों के दामों में 1.3 फीसदी इजाफा करने का फैसला लिया गया है। इतना ही नहीं कंपनी ने कहा कि गाड़ी के मॉडल और वैरिएंट के ऊपर कीमतों में इजाफा निर्भर करेगा यानि अब से मारुति की कारों की एक्स-शोरूम कीमत औसतन 1.3 प्रतिशत अधिक होगी।

2021 से लेकर अब तक कंपनी ने 5 बार अपने मॉडलों की कीमतों में इजाफा किया है। कुल मिलाकर अब तक कंपनी ने मारुति कारों की कीमतों में 10 फीसदी इजाफा किया है। कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत कंपनी ने पहले ही दे दिए थे। 6 अप्रैल को कंपनी ने अपने एक बयान में कहा था कि, पिछले एक साल में विभिन्न इनपुट कास्ट में वृद्धि की गई है, जिससे वाहनों को तैयार करने में लागत ज्यादा हो रही है।

इसलिए इस लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना जरूरी हो गया है। इनपुट कास्ट में आने वाले संसाधन स्टील, एल्युमीनियम और पैलेडियम जैसी वस्तुएं हैं, जिसकी बढ़ती कीमतों के कारण कंपनी को वाहनों को तैयार करने में लागत ज्यादा आ रही है।

महिंद्रा ने भी बढ़ाए दाम
अन्य वाहन निर्माता, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने गुरुवार को कहा कि उसने अपने पूरे मॉडल रेंज की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। कीमत में बढ़ोतरी 14 अप्रैल, 2022 से प्रभावी हो गई हैं। घरेलू ऑटो प्रमुख ने एक बयान में कहा, इसकी वजह से मॉडल और वैरिएंट के आधार पर, एक्स-शोरूम कीमतों पर 10,000 रुपये से 63,000 रुपए की बढ़ोतरी होगी। 

लेटेस्ट कीमत संशोधन के लिए स्टील, एल्युमीनियम और पैलेडियम जैसी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार ठहराया है। महिंद्रा ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "कंपनी ने कमोडिटी की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए आंशिक रूप से ऑफसेट करने के लिए जरूरी पहल की है। लागत में बढ़ोतरी का न्यूनतम प्रतिशत मूल्य संशोधन के जरिए ग्राहकों से लिया जा रहा है।" 

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