Edited By Radhika,Updated: 03 Apr, 2026 02:30 PM

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर वैश्विक राजनीति के साथ- साथ अब आपकी रसोई और बाथरूम के बजट पर पड़ने वाला है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी खींचतान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इससे आपकी डेली यूज का सामना बनाने वाली (FMCG)...
Price Hike Alert: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर वैश्विक राजनीति के साथ- साथ अब आपकी रसोई और बाथरूम के बजट पर पड़ने वाला है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी खींचतान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इससे आपकी डेली यूज का सामना बनाने वाली (FMCG) कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) से साबुन, तेल और शैम्पू जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ना तय है।
इतने बढ़ेंगे दाम
एक रिपोर्ट के अनुसार, इनपुट कॉस्ट यानी कच्चा माल महंगा होने के कारण कंपनियां अब मौजूदा कीमतों को बरकरार रखने की स्थिति में नहीं हैं। अनुमान है कि कच्चे माल की कीमतों में इसी तरह उछाल जारी रहा, तो प्रॉडक्ट्स के दाम 3% से 4% तक बढ़ाए जा सकते हैं। कंपनियों के पास फिलहाल 30 से 45 दिनों का पुराना स्टॉक बचा है, इसलिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक राहत बनी रह सकती है। असली असर वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत से दिखना शुरू होगा।
कच्चा तेल और प्लास्टिक का कनेक्शन
आम आदमी को लगता है कि कच्चे तेल का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर पड़ता है, लेकिन FMCG सेक्टर इससे गहराई से जुड़ा है। साबुन, बिस्किट और शैम्पू की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कच्चे तेल से ही बनता है। पैकेजिंग महंगी होने का बोझ सीधा ग्राहकों पर डाला जाएगा। तेल महंगा होने से माल ढुलाई (Transportation) का खर्च बढ़ गया है। जहाजों का किराया और इंश्योरेंस महंगा होने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। भारत खाद्य तेल का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है। युद्ध जैसे हालातों में सप्लाई चेन टूटने से कुकिंग ऑयल की कीमतों में भी आग लग सकती है।