Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Apr, 2026 11:14 AM

रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद सोने-चांदी के आयात में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जिसने देश के व्यापार घाटे पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
बिजनेस डेस्कः रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद सोने-चांदी के आयात में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जिसने देश के व्यापार घाटे पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से फरवरी 2025-26 के दौरान भारत का गोल्ड इंपोर्ट करीब 28.73% बढ़कर 69 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 53.52 अरब डॉलर था। सोने के आयात में इस तेज बढ़ोतरी ने देश के व्यापार घाटे को बढ़ाकर 310.60 अरब डॉलर कर दिया है, जो एक साल पहले 261.80 अरब डॉलर था। वहीं दूसरी ओर चांदी के इंपोर्ट में 143 फीसदी का उछाल देखने को मिला है।
भारत में सोने की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और राष्ट्रीय राजधानी में यह करीब 1,51,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रही हैं।
कहां से आ रहा सबसे ज्यादा सोना?
भारत के गोल्ड इंपोर्ट में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा करीब 40% है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16%+) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10%) का स्थान है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है (China के बाद) और यहां आयात का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है।
चांदी में भी जबरदस्त उछाल
इसी अवधि में सिल्वर इंपोर्ट 142.87% बढ़कर 11.43 अरब डॉलर हो गया। चांदी का उपयोग सिर्फ आभूषण ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर होता है, जिससे इसकी मांग बनी हुई है।
सरकार ने आयात को नियंत्रित करने के लिए हाल ही में सोने, चांदी और प्लैटिनम से बनी वस्तुओं के इंपोर्ट पर कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं।
CAD पर असर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, व्यापार घाटे में बढ़ोतरी की वजह से चालू खाता घाटा (CAD) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (GDP का 1.3%) हो गया। हालांकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान CAD घटकर 30.1 अरब डॉलर (GDP का 1%) रहा, जो एक साल पहले 36.6 अरब डॉलर था।