Edited By jyoti choudhary,Updated: 19 Feb, 2026 11:14 AM

कीमती धातुओं के कारोबार से जुड़े निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Multi Commodity Exchange of India (MCX) और National Stock Exchange of India (NSE) ने सोने और चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगाया गया अतिरिक्त मार्जिन हटाने का फैसला किया है।...
बिजनेस डेस्कः कीमती धातुओं के कारोबार से जुड़े निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Multi Commodity Exchange of India (MCX) और National Stock Exchange of India (NSE) ने सोने और चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगाया गया अतिरिक्त मार्जिन हटाने का फैसला किया है। यह बदलाव 19 फरवरी से लागू हो गया है। एक्सचेंजों के इस कदम से बाजार में नकदी प्रवाह (लिक्विडिटी) बढ़ने और ट्रेडिंग लागत घटने की उम्मीद है।
अब कम पूंजी में बनेगी बड़ी पोजीशन
नए निर्देशों के मुताबिक, सोने के सभी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर लगाया गया 3% अतिरिक्त मार्जिन और चांदी पर लागू 7% अतिरिक्त मार्जिन पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे पहले ट्रेडर्स को पोजीशन लेने के लिए ज्यादा राशि ब्लॉक करनी पड़ती थी। अब मार्जिन कम होने से निवेशक कम पूंजी में भी ज्यादा लॉट खरीद-बेच सकेंगे।
NSE ने भी अपने 4 फरवरी के सर्कुलर के तहत लागू समान मार्जिन को वापस ले लिया है यानी अब दोनों बड़े एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग की शर्तें आसान हो गई हैं।
क्यों लगाई गई थी सख्ती?
फरवरी की शुरुआत में सोने-चांदी में असामान्य तेजी और भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। जोखिम को नियंत्रित करने के लिए MCX Clearing Corporation Limited (MCXCCL) ने 5 और 6 फरवरी को चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त मार्जिन लगाया था। चांदी पर कुल 7% और सोने पर कुल 3% अतिरिक्त मार्जिन जोड़ दिया गया था। अब बाजार में करेक्शन आने और वोलैटिलिटी घटने के बाद एक्सचेंजों ने सख्ती वापस लेने का फैसला किया है।
छोटे निवेशकों के लिए बड़ा मौका
मार्जिन कम होने का सबसे ज्यादा फायदा रिटेल निवेशकों को मिलेगा। ज्यादा मार्जिन के कारण छोटे ट्रेडर्स बाजार से दूर हो जाते हैं, लेकिन अब कम पूंजी में भी ट्रेडिंग संभव होगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट बढ़ सकता है। हालांकि, कम मार्जिन का मतलब ज्यादा लीवरेज भी होता है, जिससे भविष्य में वोलैटिलिटी दोबारा तेज हो सकती है।
क्या फिर तेज होंगे सोने-चांदी के दाम?
मार्जिन हटने से सीधे तौर पर कीमतें तय नहीं होतीं, लेकिन ट्रेडिंग आसान होने से खरीदारी बढ़ सकती है। अगर मांग मजबूत रहती है तो सोने-चांदी को सपोर्ट मिल सकता है। फिर भी, इनकी असली दिशा अंतरराष्ट्रीय संकेतों, डॉलर इंडेक्स की चाल और अमेरिकी ब्याज दरों के फैसलों पर ही निर्भर करेगी।