RBI के नए नियमों से ग्राहकों को राहत, अब बिना सहमति बैंक नहीं बेच पाएंगे बीमा और कार्ड!

Edited By Updated: 12 Feb, 2026 01:06 PM

rbi s new rules provide relief customers banks will no longer

अगर आपने कभी बैंक से लोन लेते समय साथ में जबरन बीमा, क्रेडिट कार्ड या अन्य वित्तीय उत्पाद थमा दिए जाने का अनुभव किया है, तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिस-सेलिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले भ्रामक तरीकों...

बिजनेस डेस्कः अगर आपने कभी बैंक से लोन लेते समय साथ में जबरन बीमा, क्रेडिट कार्ड या अन्य वित्तीय उत्पाद थमा दिए जाने का अनुभव किया है, तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मिस-सेलिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले भ्रामक तरीकों यानी ‘डार्क पैटर्न’ पर सख्ती करने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव दिया है। इन नियमों के लागू होने के बाद बैंक ग्राहकों की स्पष्ट और अलग-अलग सहमति के बिना कोई अतिरिक्त प्रोडक्ट नहीं बेच पाएंगे। प्रस्तावित नियमों को 1 जुलाई 2026 से लागू करने की योजना है।

अब तक अक्सर देखा जाता था कि लोन या खाता खुलवाने के दौरान ग्राहकों को बिना पूरी जानकारी दिए बीमा, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड भी बेच दिए जाते थे। डिजिटल फॉर्म में एक ही ‘I Agree’ बटन दबाने से कई सेवाओं की मंजूरी अपने आप जुड़ जाती थी। RBI का मानना है कि यह ग्राहकों के हितों के खिलाफ है, इसलिए अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग और स्पष्ट सहमति जरूरी होगी।

नए दिशानिर्देशों के मुताबिक बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह जो उत्पाद बेच रहा है, वह ग्राहक की आय, जरूरत और प्रोफाइल के अनुरूप हो। अगर किसी ग्राहक को उसकी वित्तीय स्थिति से मेल न खाने वाला जटिल या अनावश्यक प्रोडक्ट बेचा जाता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर मिस-सेलिंग माना जाएगा। साथ ही बैंक को यह भी बताना होगा कि उत्पाद उसका अपना है या किसी तीसरी कंपनी का।

डिजिटल बैंकिंग में इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर भी सख्ती की जाएगी। पहले से टिक किए गए बॉक्स, दबाव बनाने वाले मैसेज या भ्रमित करने वाले डिजाइन अब स्वीकार्य नहीं होंगे। बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे फीचर्स हटाने होंगे, जिससे ग्राहक को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिल सके।

इसके अलावा थर्ड-पार्टी एजेंटों की जवाबदेही भी तय की गई है। बैंक को एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहकों को अपनी पहचान स्पष्ट करें। अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री को रोकने के लिए कॉलिंग समय भी तय किया जाएगा।

गलत बिक्री पर बैंक को लौटाना होगा पैसा

यदि जांच में गलत बिक्री साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक का पैसा लौटाना होगा और हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई भी करनी पड़ेगी। हर बिक्री के 30 दिनों के भीतर ग्राहक से फीडबैक लेना अनिवार्य होगा और बैंकों को नियमित रिपोर्टिंग भी करनी होगी। फिलहाल ये ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं, जिन पर 4 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किए जाने की योजना है।

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