रिलायंस को तीन हफ्तों से नहीं मिला रूसी तेल, जनवरी में भी आपूर्ति की उम्मीद नहीं

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 01:52 PM

reliance has not received russian oil for three weeks and no supplies

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने मंगलवार को साफ किया कि उसे पिछले करीब तीन सप्ताह से रूस से कच्चे तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी में भी रूसी तेल की आपूर्ति की कोई संभावना नहीं है। कंपनी ने यह बयान ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का खंडन करते हुए...

नई दिल्लीः रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने मंगलवार को साफ किया कि उसे पिछले करीब तीन सप्ताह से रूस से कच्चे तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी में भी रूसी तेल की आपूर्ति की कोई संभावना नहीं है। कंपनी ने यह बयान ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का खंडन करते हुए जारी किया।

रिलायंस ने बताया कि उसने 20 नवंबर 2025 से यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिबंधों का पालन करने के लिए गुजरात के जामनगर स्थित अपनी निर्यात-विशिष्ट (SEZ) रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर दिया है। इससे पहले रिलायंस भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार थी और जामनगर स्थित अपने विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में इसका प्रसंस्करण कर पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन तैयार करती थी।

जामनगर रिफाइनरी की संरचना

जामनगर परिसर में दो रिफाइनरियां हैं—

  • एक SEZ यूनिट, जहां से ईंधन का निर्यात यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य देशों में किया जाता है
  • दूसरी घरेलू यूनिट, जो मुख्य रूप से भारत की जरूरतों को पूरा करती है

यूरोपीय संघ रिलायंस के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार है। रूस के ऊर्जा राजस्व को निशाना बनाते हुए EU ने ऐसे ईंधन के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगाए हैं, जो रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए हों। इन्हीं नियमों के तहत रिलायंस ने अपनी SEZ रिफाइनरी में रूसी तेल का इस्तेमाल बंद किया।

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट को बताया गलत

रिलायंस ने ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट को “पूरी तरह से असत्य” बताया, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी तेल से लदे तीन जहाज जामनगर रिफाइनरी के लिए रवाना किए जा रहे हैं। कंपनी ने बयान में कहा, “जामनगर रिफाइनरी को पिछले तीन सप्ताह से रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी में भी रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति की उम्मीद नहीं है।”

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में डेटा एनालिटिक्स कंपनी केप्लर के हवाले से कहा गया था कि करीब 22 लाख बैरल यूराल क्रूड से लदे कम से कम तीन टैंकर सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि उद्योग सूत्रों के मुताबिक, ये टैंकर रिलायंस के नहीं बल्कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की बीना रिफाइनरी के लिए हो सकते हैं। सिक्का बंदरगाह का उपयोग कई कंपनियां करती हैं।

पहले सबसे बड़ी खरीदार थी रिलायंस

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रिलायंस प्रतिदिन भारत आने वाले रियायती रूसी कच्चे तेल का लगभग आधा हिस्सा (17–18 लाख बैरल) खरीदती थी। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद भारत, रूस से समुद्री कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया था।

हालांकि पश्चिमी देशों ने भारत की रूसी तेल खरीद की आलोचना की है। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क भी लगाया है।
 

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