महंगे सोने-चांदी ने छीनी कारीगरों की रोजी, आंखों में बस एक सवाल- 'घर का चूल्हा कैसे जलेगा'?

Edited By Updated: 24 Jan, 2026 06:14 PM

soaring gold and silver prices have snatched away livelihoods

सोने और चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने सर्राफा बाजार की चमक फीकी कर दी है। शादी-ब्याह और त्यौहारों के मौसम के बावजूद आभूषणों की मांग में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर गहने बनाने वाले कारीगरों पर पड़ा है। हालात यह हैं कि कई कारीगरों के हाथों से...

बिजनेस डेस्कः सोने और चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने सर्राफा बाजार की चमक फीकी कर दी है। शादी-ब्याह और त्यौहारों के मौसम के बावजूद आभूषणों की मांग में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर गहने बनाने वाले कारीगरों पर पड़ा है। हालात यह हैं कि कई कारीगरों के हाथों से काम छिन गया है और उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

कभी दिन-रात गहनों को आकार देने वाले कारीगर आज काम के इंतज़ार में बैठे हैं। कानपुर, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में कारीगरों को या तो काम से हटा दिया गया है या ठेके पर सीमित काम दिया जा रहा है। कई जगहों पर 60 से 70 प्रतिशत तक कारीगर बेरोजगार हो चुके हैं।

कानपुर के चौक में जेवर तराशने वाले कारीगर 52 वर्षीय शंकर महल अपनी दुकान के बाहर चुपचाप बैठे अपने औजारों को निहारते रहते हैं। पिछले 15 दिनों से उनके हाथ में न तो सोना है, न चांदी और न ही ऑर्डर। आंखों में बस एक सवाल है- घर का चूल्हा कैसे जलेगा?

महंगाई ने बदली ग्राहकों की पसंद

सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक भारी गहनों से दूरी बना रहे हैं। अब लोग कम वजन और हल्के डिजाइन की ज्यूलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे कारीगरों को मिलने वाला काम और मेहनताना दोनों घट गया है। 

दिल्ली में आभूषणों की बिक्री 60 से 70 प्रतिशत तक गिर चुकी है। लाजपत नगर, करोल बाग, चांदनी चौक, रोहिणी और सुभाष नगर के कारीगर इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड फैडरेशन के अनुसार सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से फिजिकल खरीदारी में भारी गिरावट आई है।

छोटे कारोबारी भी संकट में

सर्राफा कारोबार से जुड़े छोटे और मध्यम व्यापारी भी इस मंदी से जूझ रहे हैं। कई ज्यूलरी दुकानों में ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं, जिससे उत्पादन ठप्प पड़ता जा रहा है। अनुमान है कि अकेले उत्तर प्रदेश में लाखों कारीगर इस संकट से प्रभावित हैं। गाजियाबाद सर्राफ एसोसिएशन के संरक्षक राजकुमार गुप्ता के मुताबिक ग्राहकों की मांग के बराबर ही काम बचा है।

घर चलाना मुश्किल, पेशा बदलने की मजबूरी

कारीगरों का कहना है कि लगातार काम न मिलने से परिवार का खर्च उठाना कठिन हो गया है। कई युवा कारीगर अब पारंपरिक पेशा छोड़कर दूसरे रोजगार की तलाश में हैं, जिससे यह सदियों पुरानी कला समाप्त होने के कगार पर पहुंच सकती है।

नोएडा के लगभग 65 प्रतिशत कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। छोटे-मध्यम कारोबारी रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं। नोएडा ज्वैलर्स एसोसिएशन के महासचिव के अनुसार पहले ऑर्डर मिलने के बाद तैयार माल बिकता था लेकिन अब 1000 से अधिक ज्यूलरी दुकानों में से कई में काम बंद हो गया है।

सरकार से राहत की उम्मीद

कारीगर संगठनों ने सरकार से आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो सर्राफा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कारीगर पूरी तरह टूट जाएंगे।

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