Edited By jyoti choudhary,Updated: 25 Feb, 2026 04:15 PM

देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज कृत्रिम मेधा (एआई) से 'डरी हुई' नहीं है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने सहयोगियों द्वारा विकसित एआई टूल्स के कारण राजस्व में होने
मुंबईः देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज कृत्रिम मेधा (एआई) से 'डरी हुई' नहीं है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने सहयोगियों द्वारा विकसित एआई टूल्स के कारण राजस्व में होने वाली 'कमी' के लिए भी तैयार है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के. कृतिवासन ने यहां वार्षिक एनटीएलएफ कार्यक्रम में कहा कि कंपनी यह देख रही है कि 'कुशल' युवा कर्मचारियों की तुलना में वरिष्ठ स्तर के कर्मचारी एआई-आधारित समाधान तैयार करने में धीमे हैं।
कृतिवासन ने कहा, ''हम अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे (ग्राहकों के पास) जाएं और एआई का उपयोग करें, भले ही इससे हमारे राजस्व में कमी आए।'' उन्होंने कहा कि टीसीएस इस बात पर जोर दे रही है कि उसके छह लाख से अधिक कर्मचारियों में प्रत्येक एआई में पारंगत हो। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी इस नई प्रौद्योगिकी के चलते नौकरियों में छंटनी को लेकर 'डरी' हुई नहीं है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों के तहत टीसीएस ने अपने सहयोगियों से यह पता लगाने के लिए कहा है कि वे परियोजनाओं में एआई का उपयोग कैसे कर सकते हैं, भले ही इसके कारण राजस्व में कुछ नुकसान उठाना पड़े। कृतिवासन ने कहा कि हर कोई एआई कौशल सीखना चाहता है और उन्हें सीखने के लिए प्रोत्साहन देने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने साथ ही जोड़ा कि जैसे-जैसे लोग आगे बढ़ते हैं और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारी बनते हैं, वे बहुत कुछ पढ़ते तो हैं लेकिन उस पर कुछ निर्माण नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को मेहनत करनी होगी और एआई टूल का उपयोग करके समाधान बनाने होंगे। उन्होंने एआई को एक सभ्यतागत बदलाव करार दिया और कहा कि इससे ज्ञान सर्वसुलभ होगा।