Edited By jyoti choudhary,Updated: 30 Sep, 2022 06:12 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि रुपए में द्विपक्षीय व्यापार के निपटान के लिए उसे ‘चार-पांच देशों और कई बैंकों से अच्छी प्रतिक्रिया' मिली है। यूक्रेन-रूस संघर्ष शुरू होने के बाद आरबीआई ने 11 जुलाई को रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार...
मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि रुपए में द्विपक्षीय व्यापार के निपटान के लिए उसे ‘चार-पांच देशों और कई बैंकों से अच्छी प्रतिक्रिया' मिली है। यूक्रेन-रूस संघर्ष शुरू होने के बाद आरबीआई ने 11 जुलाई को रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटान से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए थे। इस कवायद का मकसद रुपए का अंतरराष्ट्रीयकरण करना और स्थानीय मुद्रा पर तेजी से बढ़ते डॉलर के दबाव को कम करना था।
रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा था,‘‘रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटान तंत्र से निर्यात को बढ़ावा देने के साथ ही वैश्विक व्यापार में वृद्धि तथा रुपए में वैश्विक व्यापारिक समुदाय की बढ़ती रुचि का समर्थन हो सकेगा।'' नीतिगत घोषणा के मौके पर डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने संवाददाताओं से कहा कि ‘‘प्रतिक्रिया (रुपए में व्यापार निपटान) काफी अच्छी रही है लेकिन इस प्रक्रिया में बैंकों, केंद्रीय बैंकों और सरकारों के स्तर पर बहुत अधिक समीक्षा शामिल है, इसलिए इसमें समय लग रहा है।''
उन्होंने हालांकि रुपए में द्विपक्षीय व्यापार को निपटाने के इच्छुक किसी भी देश या विदेशी बैंक का नाम लेने से इनकार किया और कहा, ‘‘हालांकि, मैं किसी भी देश या विदेशी बैंक का नाम नहीं ले सकता, जिन्होंने इसमें रुचि दिखाई है लेकिन मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। कम से कम चार-पांच देशों और कई विदेशी बैंकों के साथ ही कई स्थानीय बैंकों से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं।'' रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद रुपए पर बढ़ते दबाव के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। चालू वित्त वर्ष में अबतक रुपया 7.6 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है। हालांकि, उभरते बाजारों में अभी भी रुपए का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से काफी अच्छा है।