Edited By jyoti choudhary,Updated: 13 Apr, 2026 06:25 PM

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश के बाद इसका सीधा असर पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX)...
बिजनेस डेस्कः इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश के बाद इसका सीधा असर पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) पर देखने को मिला।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, फिर आंशिक रिकवरी
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को कारोबार की शुरुआत में पाकिस्तान का बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स 5000 अंकों से ज्यादा टूट गया और सुबह करीब 9:50 बजे 161,638.07 के इंट्राडे निचले स्तर तक गिर गया। पिछला बंद स्तर 167,191.37 था।
क्यों मचा बाजार में हड़कंप?
दरअसल, 21 घंटे चली मैराथन वार्ता के बाद भी सीजफायर पर सहमति नहीं बन सकी। ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम जारी रखने के फैसले के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का आदेश दिया। इससे Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
इसका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों जैसे हैंगसेंग और निक्केई पर भी देखने को मिला।
पाकिस्तान के लिए कितना अहम है होर्मुज?
पाकिस्तान अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 80-85% सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है। वहीं, लगभग 99% LNG सप्लाई भी इन्हीं देशों से आती है।
यदि नाकेबंदी लंबी चलती है, तो पाकिस्तान का पेट्रोलियम आयात बिल 3.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
महंगाई और बिजली संकट का खतरा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से पाकिस्तान का सालाना आयात बिल 1.8 से 2 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। इससे घरेलू महंगाई 15-17% तक पहुंचने की आशंका है।
तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने पर बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा, जिससे पावर कट बढ़ सकते हैं और उद्योगों में कामकाज ठप पड़ने का खतरा है।