Edited By Mansa Devi,Updated: 11 Mar, 2026 06:06 PM

राजधानी Delhi में बढ़ते वायु प्रदूषण और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
नेशनल डेस्क: राजधानी Delhi में बढ़ते वायु प्रदूषण और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसी कड़ी में सरकार जल्द ही Delhi EV Policy 2.0 लागू करने की तैयारी कर रही है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना और लोगों को साफ ऊर्जा वाले परिवहन विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मौजूदा EV पॉलिसी की अवधि बढ़ाई गई
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए Delhi Electric Vehicle Policy 2020 लागू की गई थी। इस पॉलिसी की अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है और फिलहाल इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। अब सरकार नई और अधिक प्रभावी नीति लाने के लिए मसौदा तैयार कर चुकी है। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव और विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। उम्मीद है कि नई नीति वित्त वर्ष 2026 से लागू हो सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य
नई पॉलिसी का मुख्य लक्ष्य दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ाना है। प्रस्ताव के अनुसार 2027 तक नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में लगभग 95 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य मौजूदा नीति में तय किए गए 25 प्रतिशत लक्ष्य से काफी बड़ा है। सरकार का मानना है कि इससे शहर में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और लोग पेट्रोल-डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर खास ध्यान
नई नीति में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। प्रस्ताव के अनुसार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर करीब 21,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जा सकती है। वहीं महिलाओं को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। महिला खरीदारों को लगभग 30,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में दिल्ली की सड़कों पर करीब 12 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन चलें।
इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को भी फायदा
नई नीति में इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को भी आर्थिक मदद देने का प्रस्ताव रखा गया है। ड्राफ्ट के अनुसार बैटरी क्षमता के आधार पर प्रति किलोवाट घंटा लगभग 10,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। इस प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा करीब 1 लाख रुपये प्रति वाहन रखी जा सकती है। इससे इलेक्ट्रिक कारों की कीमत आम लोगों के लिए कुछ हद तक किफायती हो सकती है।
पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने की योजना
सरकार एक नई योजना पर भी विचार कर रही है, जिसमें पेट्रोल या डीजल से चलने वाले पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए सहायता दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति अपने वाहन को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराता है तो उसे लगभग 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद मिल सकती है। शुरुआत में यह योजना सीमित संख्या में वाहनों पर लागू की जा सकती है।
चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर
नई EV नीति का एक बड़ा हिस्सा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से जुड़ा है। सरकार शहर के अलग-अलग मोहल्लों में ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। इसके अलावा Ring Road Delhi और Outer Ring Road Delhi के आसपास फास्ट चार्जिंग कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने वालों को चार्जिंग की सुविधा आसानी से मिल सके।
साफ ऊर्जा की ओर बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि नई EV Policy 2.0 लागू होने के बाद दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि शहर को साफ और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी बड़ा फायदा मिलेगा।