200 साल पुराने शिव मंदिर का 120 फुट ऊंचा गुंबद गिरा, मलबे में दबने से सेवादार की मौत

Edited By Updated: 22 Jun, 2026 11:19 AM

200 year old temple tragedy

बाबैन में करीब 200 साल पुराने शिव मंदिर का करीब 120 फीट ऊंचा मुख्य गुंबद अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में मंदिर के पास सो रहे सेवादार बाबा नटराजन गिरि निवासी हस्तिनापुर, उ.प्र. की मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई।

बाबैन (कुरुक्षेत्र) (दिनेश): बाबैन में करीब 200 साल पुराने शिव मंदिर का करीब 120 फीट ऊंचा मुख्य गुंबद अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में मंदिर के पास सो रहे सेवादार बाबा नटराजन गिरि निवासी हस्तिनापुर, उ.प्र. की मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई। वह करीब 5 साल से मंदिर में रह रहा था। साथ ही मंदिर के गुंबर का मलबा मंदिर के गर्भगृह में भी गिरा जिससे मंदिर में स्थापित शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचा।  

जानकारी के मुताबिक सेवादार नटराजन गिरि हमेशा की तरह मंदिर के बाहर बगल में अपनी चारपाई पर सोया हुआ था। सुबह करीब 4 बजे अचानक मंदिर का विशाल गुंबद गिर पड़ा जिससे नटराजन मलबे के नीचे दब गया। गुंबद गिरने की तेज आवाज सुनकर मंदिर के पुजारी व अन्य सेवादार भी मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद नटराजन गिरि को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। 

 लोगों का मानना है कि गुंबद की दीवार मोटी न होने और गुंबद ज्यादा ऊंचा होने के कारण शायद गुंबद की दीवारें अपना ही वजन नहीं सह सकीं और अपने ही भार में गिर गया। ग्रामीणों का मानना है कि गुंबद गिरने की घटना रात के समय होने के कारण मंदिर में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।  घटना की सूचना मिलते ही बाबैन पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और शव को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी। साधु समाज के लोगों ने शव का पोस्टमार्टम करवाने का हल्का विरोध किया लेकिन पुलिस द्वारा समझाने के उपरांत वे राजी हो गए। 

साधु समाज के लोगों ने महंत त्रिकाल गिरि महाराज की देख-रेख में साधु परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर में ही जमीन खोद कर नटराजन गिरि को समाधि दे दी। हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधि कैलाश सैनी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस घटना के कारणों की जांच करवाई जाएगी और प्रशासन की ओर से भी हरसंभव मदद की जाएगी।

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