इतिहास, आस्था और चमत्कार का अद्भुत संगम है मेहरानगढ़ किले का चामुंडा माता मंदिर, जानिए इस दिव्य मंदिर का रहस्य

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 08:44 AM

chamunda mata temple mehrangarh fort

जस्थान की भव्यता का प्रतीक जोधपुर शहर अपनी बेमिसाल हवेलियों की भवन निर्माण कला, मूर्ति कला तथा वास्तु शैली के लिए दूर-दूर तक विख्यात है।

Chamunda Mata Temple Mehrangarh Fort : राजस्थान की भव्यता का प्रतीक जोधपुर शहर अपनी बेमिसाल हवेलियों की भवन निर्माण कला, मूर्ति कला तथा वास्तु शैली के लिए दूर-दूर तक विख्यात है। इसी शहर के लगभग 400 फुट ऊंचे शैल के पठार पर स्थित है भारत के सबसे विशाल किलों में से एक मेहरानगढ़ का भव्य किला। यह किला वर्तमान नरेश महाराजा गज सिंह के राज परिवार का निवास स्थान तो है ही, इसी किले में एक भव्यता का प्रतीक उत्कृष्ट म्यूजियम तथा मां जगदम्बा चामुंडा का मंदिर भी है जो किले के दक्षिणी भाग में सबसे ऊंचे प्राचीर पर स्थित है।

Chamunda Mata Temple Mehrangarh Fort

श्री चामुंडा देवी का यह मंदिर जोधपुर राज परिवार का इष्ट देवी मंदिर तो है ही बल्कि लगभग सारा जोधपुर ही इस मंदिर की देवी को अपनी इष्ट अथवा कुल देवी मानता है। इस मंदिर में देवी की मूर्ति 1460 ई. में चामुंडा देवी के एक परमभक्त मंडोर के तत्कालीन राजपूत शासक राव जोधा द्वारा अपनी नवनिर्मित राजधानी जोधपुर में बनाए गए किले में ही स्थापित की गई। किले की छत पर विराजमान यह मंदिर अपनी मूर्तिकला तथा उत्तम भवन निर्माण कला की एक अनूठी मिसाल है जहां से सारे शहर का विहंगम दृश्य साफ नजर आता है।

Chamunda Mata Temple Mehrangarh Fort

सूर्य की आभा का आभास देते श्री चामुंडा देवी मंदिर में प्रवेश करने का मार्ग आसपास बनी आकर्षक मूर्तियों से सुसज्जित है। मंदिर में स्थापित मां भवानी की मूर्ति मगन बैठी मुद्रा की बजाय चलने की मुद्रा में नजर आती है। शत्रुओं से अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी का यह रौद्र रूप है जो सांसारिक शत्रुओं से उनकी रक्षा के साथ-साथ उनके भौतिक, (शारीरिक) दुखों तथा मानसिक त्रासदियों को दूर करके उनमें आत्मविश्वास एवं वीरता का संचार कर जीवन को एक गति प्रदान करता है। नवरात्रों में तो सारे प्रदेश से यहां भक्तों का आवागमन होता है।

श्री मत्स्य पुराण तथा श्री मार्कंडेय पुराण में विशेष तौर पर भगवती चामुंडा देवी के प्रताप व वैभव का वर्णन है। महाभारत के वन पर्व तथा श्री विष्णु पुराण के धर्मोत्तर में भी आदिशक्ति की स्तुति की गई है। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम में जब शिवा (मां शक्ति) ने राक्षस सेनापति चंड तथा मुंड नामक दो शक्तिशाली असुरों का वध कर दिया तो मां दुर्गा द्वारा देवी के इस शत्रु नाशिनी रूप को चामुंडा का नाम दिया गया। जैन धर्म में भी देवी मां चामुंडा को मान्यता प्राप्त है तथा मां देवी का यह रूप पूर्णत सात्विक रूप में पूजा जाता है। 

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