आज का पंचांग- 29 अप्रैल, 2026

Edited By Updated: 29 Apr, 2026 10:50 AM

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Aaj Ka Panchang आज का पंचांग 29 अप्रैल 2026, बुधवार : आज 29 अप्रैल 2026 का दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ प्रारंभ हो रहा है। जो सायं 7:52 बजे के बाद चतुर्दशी तिथि में प्रवेश करने वाला है। आज का दिन विशेष रुप से आध्यात्मिक साधना,...

Aaj Ka Panchang आज का पंचांग 29 अप्रैल 2026, बुधवार : आज 29 अप्रैल 2026 का दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ प्रारंभ हो रहा है। जो सायं 7:52 बजे के बाद चतुर्दशी तिथि में प्रवेश करने वाला है। आज का दिन विशेष रुप से आध्यात्मिक साधना, व्रत और पूजा-पाठ के साथ जुड़ा हुआ है।

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तिथि, नक्षत्र और योग
त्रयोदशी तिथि का प्रभाव केवल सायंकाल तक होगा। उसके बाद चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा। ग्रह-नक्षत्रों की बात करें तो हस्त नक्षत्र रात 12:17 तक रहेगा तत्पश्चात चित्रा नक्षत्र शुरु हो जाएगा। योगों में हर्षण योग रात 8:52 तक रहेगा, जो शुभ कार्यों को करने हेतु मंगलमय है। फिर वज्र योग आरंभ होगा, इस दौरान किए गए कामों में सतर्कता बरतने की अवश्यकता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और काल गणना
सूर्योदय प्रातः 5:49 बजे और सूर्यास्त सायं 7:02 बजे होगा। 

राहुकाल और दिशा शूल
राहुकाल दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक रहेगा, कोई भी मांगलिक काम न करें। दिशा शूल उत्तर और वायव्य दिशा में है, अतः इन दिशा की यात्रा न करें।

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चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति 
चंद्रमा दिन में कन्या राशि में अवस्थित रहेगा, जो विश्लेषण, बुद्धिमत्ता और सूक्ष्मता का प्रतीक माना गया है। अन्य ग्रहों की स्थिति इस प्रकार है:
सूर्य मेष में
मंगल, बुध और शनि मीन में
गुरु मिथुन में
शुक्र वृष में
राहु कुंभ में
केतु सिंह में

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व्रत, पर्व और त्यौहार
प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाता है। यह व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है और इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत का महत्व विशेष रूप से शिव भक्तों के लिए अत्यधिक है और इसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली उपाय माना जाता है। प्रदोष व्रत का आयोजन दिन के अंतिम भाग (संध्या वेला) में होता है, जब सूर्य अस्त होने के बाद और रात्रि के आगमन से पहले का समय होता है। इसे प्रदोष काल कहा जाता है। इस व्रत में संध्या समय शिव पूजन और दीपदान का विधान है। 

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र में प्रसिद्ध “पीपल जातर मेला” का शुभारंभ भी आज से हो रहा है, जो लोक आस्था और परंपरा का प्रतीक है।

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