Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 Jun, 2026 01:36 PM

हिंदू धर्म में अधिक मास का बहुत खास महत्व है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह को भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और उनकी कृपा पाने के लिए खास माना जाता है।
Adhik Maas 33 Malpua Daan : हिंदू धर्म में अधिक मास का बहुत खास महत्व है। इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह को भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और उनकी कृपा पाने के लिए खास माना जाता है। इस माह में किया गया दान का फल बाकी महीनों के मुताबिक ज्यादा मिलता है। आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम में इतने व्यस्त हो गए है कि उनके पास पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने का बिल्कुल भी समय नहीं हैं। अगर किसी कारण कोई व्यक्ति अधिक मास में दान करने और पूजा-पाठ करने से रह गए हैं, तो अधिक मास के अंतिम दिन यानी अमावस्या के दिन 33 मालपुआ का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इस एक दिन में किया गया दान पूरे महीने के दान के बराबर पुण्य फल दे देता है। तो आइए जानते हैं कि अमावस्या पर 33 मालपुओं के दान करने की सही विधि के बारे में-
अमावस्या पर क्यों किया जाता है 33 मालपुआ का ही दान?
हिंदू पुराणों के अनुसार, 33 मालपुए के दान की संख्या का संबंध 33 करोड़ या 33 कोटि देवी-देवताओं से माना जाता है। अधिक मास में प्रत्येक मालपुए को एक-एक देवता का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन 33 मालपुए का दान करने से जीवन में आ रही सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह भी कहा जाता है कि अधिकमास की अमावस्या पर 33 मालपुए दान करने से पूरे महीने की पूजा और दान का लाभ फल मिलता है और मन की हर मुराद पूरी होती है।

अधिक अमावस्या पर 33 मालपुए दान करने की विधि
अधिक अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
फिर घर के किचन की अच्छे से सफाई करें और शुद्ध देसी घी के साथ 33 मालपए तैयार करें।
शास्त्रों के अनुसार, 33 मालपुए का दान कांसे के बर्तन में करना शुभ माना जाता है। अगर किसी कारण कांसे के बर्तन नहीं है, तो मिट्टी के नए पात्र, पीतल के बर्तन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
33 मालपुए दान करने से पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें और सबसे पहले उन्हें मालपुए का भोग लगाएं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए हाथ में जल लेकर दान का संकल्प करें। प्रत्येक मालपुए के ऊपर या थाली में अपनी क्षमता के अनुसार कुछ दक्षिणा रखें।
पूजा पूरी होने के बाद पात्र को किसी ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान करें। दान देने के बाद ब्राह्मण के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लें।

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