Edited By Prachi Sharma,Updated: 27 Mar, 2026 08:23 AM

Ayodhya Ram Navami 2026 : चैत्र मास की पावन नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित राम जन्म का पावन क्षण आज पुनः श्रद्धालुओं के लिए उत्सव का कारण बना...
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Ayodhya Ram Navami 2026 : चैत्र मास की पावन नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित राम जन्म का पावन क्षण आज पुनः श्रद्धालुओं के लिए उत्सव का कारण बना हुआ है। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और चारों ओर श्रीराम के जयकारे गूंज रहे हैं। शुक्रवार को ठीक दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम के प्राकट्य की महाआरती आयोजित की जाएगी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।
इस वर्ष राम नवमी के अवसर पर रामलला विशेष पीताम्बरी वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से रामलला के वस्त्रों की डिजाइनिंग प्रसिद्ध ड्रेस डिजाइनर मनीष त्रिपाठी द्वारा की जा रही है। इस बार उन्होंने खादी के वस्त्र पर पारंपरिक हस्तशिल्प और जरी कढ़ाई से सजी पीताम्बरी तैयार की है, जिसे खास तौर पर राम जन्मोत्सव के लिए बनाया गया है। इन नए परिधानों में सजे रामलला के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
राम नवमी मेले के अवसर पर अयोध्या स्थित राम मंदिर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से सजाया जाएगा, वहीं गर्भगृह में फूल बंगला भी तैयार किया जाएगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन के समय में भी बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक भक्त भगवान के दर्शन कर सकें।
इस उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति संगीत का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें पद्मश्री मालिनी अवस्थी सहित कई प्रसिद्ध कलाकार बधाई गीत प्रस्तुत करेंगे। सुबह करीब 10:30 बजे से भगवान रामलला के अभिषेक का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा, जिसे देश-विदेश के श्रद्धालु देख सकेंगे।
राम जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर एक भक्त ने रामलला के लिए स्वर्ण आभूषण भी भेंट किए हैं। यही भक्त पहले राम मंदिर के शिखर को स्वर्णमंडित कराने में भी योगदान दे चुके हैं। इस दिन बाल स्वरूप रामलला का पंचामृत से वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक किया जाएगा, जो इस उत्सव का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान होगा।