क्या आपने किए हैं इस भीम कुंड के दर्शन?

Edited By Updated: 06 Jan, 2022 06:15 PM

bhimkund mp chhatarpur

भारत देश में जगह-जगह पर हिंदू धर्म के कई पवित्र धाम स्थापित हैं। तो वहीं हिंदू धर्म के कई ऐसे पात्र भी हैं जिनका जिक्र शास्त्रों में आसानी से मिल जाता है। साथ ही उनके अस्तित्व के प्रमाण भी आए दिन लोगों को मिलते रहते हैं।

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भारत देश में जगह-जगह पर हिंदू धर्म के कई पवित्र धाम स्थापित हैं। तो वहीं हिंदू धर्म के कई ऐसे पात्र भी हैं जिनका जिक्र शास्त्रों में आसानी से मिल जाता है। साथ ही उनके अस्तित्व के प्रमाण भी आए दिन लोगों को मिलते रहते हैं। आज हम आपको अपनी इस आर्टकिल में ऐसे ही एक प्रमाण के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी खोज बुंदेलखंड के छतरपुर में हुई है।

बता दें कि बुंदेलखंड के लोगों ने वेदों में वर्णित कुंड को असल ज़िंदगी में खोज निकाला है और वो खोज है भीम कुंड की, जिसका उल्लेख आपको कई धार्मिक ग्रथों में मिल जाएगा।  चलिए आगे बढ़ते हुए आपको बताते हैं कि ये खोज कैसे हुई और ये भीम कुंड का तात्पर्य क्या है।

छतरपुर जिले से करीब 80 किलोमीटर क़ि दूरी पर दुर्गम पहाडियों के बीचों-बीच प्रकृति क़ी अनोखी छटा में स्थित यह है भीम कुण्ड नाम क़ा वह स्थान, जिसका उल्लेख हमारे धार्मिक ग्रन्थ महाभारत में किया गया है। वैसे तो इस भीम कुण्ड की गाथा हम सभी जानते हैं लेकिन आज तक किसी ने इस जगह को देखा नहीं था। पर बुंदेलखंड के निवासियों ने इस कुंड की खोज कर लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिया है। 

कहते हैं जब पांच पांडवो क़ा बनवास हुआ तो वनवास के समय द्रौपदी को असहनीय प्यास लगी और वे पांचो भाइयों से पानी क़ि मांग करने लगी लेकिन पहाडियों और जंगलों में पानी मिलना एक कल्पना मात्र था। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान रखने वाले नकुल और सहदेव ने भीम को इसी पहाड़ी की चोटी पर अथाह पानी होने का संकेत दिया। जिसके बाद भीम ने अपनी गदा से पहाड़ी की उसी चोटी पर प्रहार किया। और गदा मारते ही विशाल जल की धारा निकली। जिससे द्रौपदी ने अपनी पानी की प्यास बुझाई। तो चलिए अब भीम कुंड देखने पहुंचे एक श्रद्धालु से जानते हैं उनका इस खोज को लेकर क्या कहना है।

ऐसा माना जा रहा है इस कुंड को भीम कहने के पीछे की वजह पहाड़ी पर बना वो निशान है जो भीम के गदा मारने पर बना होगा। इस स्थान पर पहाड़ी क़ी चोटी पर आज भी एक छेद है जिसे भीम के गदा क़ी निशानी के तौर पर देखा जा रहा है। और जल क़ा ये अनोखा नजारा जमीन से 200 मीटर गुफा के द्वारा रास्ता तय करने के बाद दिखाई देता है इसके अलावा कुछ वेदों के जानकर इस जगह को पांडवों के वनवास क़ी कर्म स्थली बता रहे हैं। 

सतयुग में भीम के गदा से निकला अथाह जल से बना हुआ ये कुंड लोगों के लिए कोतुहाल क़ा विषय बना हुआ है। कई बार स्थानीय लोगो के साथ साथ गोताखोरों ने इस जलाशय क़ि थांह लेना चाही लेकिन वे इस अदभुत जल के छोर तक नहीं पहुंच पाए।

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