Buddha story with moral: शास्त्रीय कथा से जानें, भगवान बुद्ध की दृष्टि से मोह-माया और आत्मबोध का संदेश

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 05:39 PM

buddha story with moral

Buddha story with moral:  सच्चा सुख केवल परमात्मा में है। इसलिए जो सच्चा सुख चाहते हैं, उन्हें अन्य सब ओर से मुंह मोड़कर एकमात्र परमात्मा की ही शरण लेनी चाहिए, उन्हीं में मन लगाकर उन्हीं की भक्ति, उन्हीं की सेवा करनी चाहिए। जगत को जनार्दन समझकर जगत...

Buddha story with moral:  सच्चा सुख केवल परमात्मा में है। इसलिए जो सच्चा सुख चाहते हैं, उन्हें अन्य सब ओर से मुंह मोड़कर एकमात्र परमात्मा की ही शरण लेनी चाहिए, उन्हीं में मन लगाकर उन्हीं की भक्ति, उन्हीं की सेवा करनी चाहिए। जगत को जनार्दन समझकर जगत की सेवा करना ही भगवान की ही सेवा है।

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एक नगर सेठ था। उसने बहुत बड़ी हवेली बनवा रखी थी। एक बार भगवान बुद्ध उधर से गुजरे। नगर सेठ को जैसे ही इसकी जानकारी मिली वह आया, भगवान बुद्ध को अपनी हवेली में आने का निमंत्रण दिया और निवेदन किया आप यहीं प्रवचन और लोगों को ज्ञान का दान दिया कीजिए।

जब तक आप इस नगर में रुके हैं, आप मेरा ही आतिथ्य स्वीकार कीजिए।

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भगवान बुद्ध ने उसका अनुरोध स्वीकार कर लिया लेकिन जब भी सेठ भगवान बुद्ध के पास आता, हर समय अपनी हवेली की ही बात किया करता। कहता मेरी हवेली बहुत बड़ी है। आसपास ऐसी कोई हवेली नहीं है, मेरा बगीचा आपने देखा ही होगा, बहुत सुंदर है, तरह-तरह के फूल खिले हैं। हमेशा मैं, मैं और अपनी ही बात वह करता रहता।

जब वहां भगवान बुद्ध का प्रवास पूरा हो गया और वह चलने लगे तो उस नगर सेठ से कहा अच्छा ठीक है अब तो मैं जा रहा हूं ऐसा करो कि विश्व का एक नक्शा ले आओ। सेठ कुछ समझ नहीं पाया फिर भी उसने विश्व के नक्शे की व्यवस्था की। भगवान बुद्ध ने उससे पूछा यह नक्शा विश्व का है?

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सेठ बोला, ‘‘जी हां।’’

भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘इस नक्शे में भारत देख रहे हो तुम?’’

सेठ ने कहा, ‘‘हां, यह नीचे जो है, यही भारत है।’’

भगवान बुद्ध ने फिर पूछा, ‘‘ठीक है तुमने भारत को देख लिया अब यह बताओ कि इसमें तुम्हारा प्रांत कहां है?’’

तो सेठ ने नक्शे को थोड़ा ऊपर उठाया और बताया, ‘‘यह है मेरा प्रांत।’’

भगवान बुद्ध फिर बोले, ‘‘ठीक है तुमने अपना प्रांत देख लिया, क्या तुम यह बता सकते हो कि जिस जिले में रहते हो वह जिला कहां है?’’

तो नक्शे में उसका जिला एक छोटे से बिंदू के बराबर ही था। एकदम छोटा-सा बिंदू के बराबर उसमें लिखा था जिले का नाम। 

भगवान बुद्ध ने फिर पूछा, ‘‘तुमने जिला तो देख लिया इसमें अब जिस तहसील में तुम रहते हो वह तहसील इसमें कहां है?’’

सेठ ने कहा, ‘‘जब जिला एक बिंदू जैसा है तो उसके अंदर भी एक छोटा बिंदू होगा उसी में तहसील होगी।’’

भगवान बुद्ध ने कहा, ‘‘ठीक है तुमने  तहसील देख ली अपनी, अब तुम बताओ इसमें तुम्हारा गांव कहां है?’’

सेठ बोला, ‘‘बड़ी मुश्किल से तो इसमें तहसील दिखाई दी है। इसमें सैंकड़ों गांव हैं, अब इसमें मेरा गांव कहां से दिखाई देगा? यह तो बहुत मुश्किल है।’’

भगवान बुद्ध बोले, ‘‘विश्व के नक्शे में तुम्हारा गांव भी नहीं दिखाई दे रहा है और जिस दिन से मैंने तुम्हारा आतिथ्य स्वीकार किया है, तुम एक ही रट लगा रहे हो मेरा महल, मेला बगीचा, मेरे फूल पौधे, मेरा यह सब, मेरा वह सब। यह तुम्हारी मूर्खता नहीं तो और क्या है!’’

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