Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Feb, 2026 11:44 AM

इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि ऐतिहासिक होने वाली है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, लगभग 300 वर्षों के अंतराल के बाद यह दूसरा मौका है जब महाशिवरात्रि पर एक साथ 12 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।
Kashi Vishwanath Temple : इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि ऐतिहासिक होने वाली है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, लगभग 300 वर्षों के अंतराल के बाद यह दूसरा मौका है जब महाशिवरात्रि पर एक साथ 12 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। ग्रहों की यह दुर्लभ स्थिति भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी मानी जा रही है।
क्या है इस महा-संयोग का महत्व ?
आमतौर पर महाशिवरात्रि पर दो या तीन शुभ योग बनते हैं, लेकिन इस बार शिव योग, सिद्ध योग, और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कुल 12 विशिष्ट संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि इतने शुभ योगों के मिलन के बीच की गई पूजा और जलाभिषेक का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। यह संयोग साधकों के लिए सिद्धि प्राप्त करने और आम भक्तों के लिए कष्टों से मुक्ति पाने का सुनहरा अवसर है।
काशी विश्वनाथ धाम में भव्य तैयारियां
इस दुर्लभ अवसर को देखते हुए वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के प्रवेश और निकास द्वारों को बढ़ाया गया है। भक्तों के लिए गंगा द्वार से भी सीधे प्रवेश की व्यवस्था की गई है।
वाराणसी की गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक भक्तों के लिए मैट बिछाए जाएंगे और धूप से बचने के लिए शेड लगाए जा रहे हैं। जो लोग मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए बाहर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी ताकि वे बाबा के लाइव दर्शन और आरती देख सकें। पूरे मंदिर क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है और जगह-जगह मेडिकल कैंप व पेयजल की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए खास निर्देश
मंदिर प्रशासन ने अपील की है कि दुर्लभ योगों के कारण इस बार भीड़ सामान्य से कई गुना अधिक हो सकती है, इसलिए भक्त धैर्य बनाए रखें। जलाभिषेक के लिए स्टील के पात्रों का उपयोग और झांकी दर्शन की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
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