Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Mar, 2026 12:50 PM
हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि 2026 का आगाज़ इस बार बेहद खास और शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। 19 मार्च से शुरू होने वाले इस पावन उत्सव में जगत जननी मां दुर्गा इस वर्ष डोली पर सवार होकर धरती पर आगमन करेंगी।
Chaitra Navratri 2026 Bhog List : हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि 2026 का आगाज़ इस बार बेहद खास और शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। 19 मार्च से शुरू होने वाले इस पावन उत्सव में जगत जननी मां दुर्गा इस वर्ष डोली पर सवार होकर धरती पर आगमन करेंगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, माता का डोली पर आना भक्तों के प्रति उनकी असीम ममता और आध्यात्मिक बदलाव का संकेत है। नौ दिनों तक चलने वाली इस शक्ति साधना में केवल मंत्र और प्रार्थना ही नहीं, बल्कि भोग का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि यदि मां के हर स्वरूप को उनकी रुचि के अनुसार सात्विक नैवेद्य अर्पित किया जाए, तो साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। तो आइए जानते हैं कि कलश स्थापना से लेकर महानवमी तक आपको मां को किन-किन पकवानों का भोग लगाना चाहिए, ताकि आप पर भी बरसे माँ जगदंबा की अखंड कृपा।
प्रथम दिन: मां शैलपुत्री (19 मार्च)
नवरात्रि के पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री की पूजा होती है।
विशेष भोग: मां शैलपुत्री को गाय का शुद्ध घी अर्पित करना चाहिए। माना जाता है कि इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है और शरीर रोगमुक्त रहता है।
द्वितीय दिन: मां ब्रह्मचारिणी (20 मार्च)
दूसरे दिन तपस्या की देवी मां ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जाता है।
विशेष भोग: मां को चीनी (शक्कर), मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है। इससे लंबी आयु और सौभाग्य का वरदान मिलता है।
तृतीय दिन: मां चंद्रघंटा (21 मार्च)
साहस और शांति की देवी मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजें प्रिय हैं।
विशेष भोग: इस दिन मां को दूध या दूध से बनी मिठाई (जैसे खीर या रबड़ी) का भोग लगाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है और दुखों का नाश होता है।
चतुर्थ दिन: मां कुष्मांडा (22 मार्च)
ब्रह्मांड की रचयिता मां कुष्मांडा को मीठा बहुत पसंद है।
विशेष भोग: चौथे दिन मां को मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। इससे बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

पंचमी तिथि: मां स्कंदमाता (23 मार्च)
भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता को पीले रंग की वस्तुएं प्रिय हैं।
विशेष भोग: पांचवें दिन मां को केले का भोग लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
षष्ठी तिथि: मां कात्यायनी (24 मार्च)
महिषासुर मर्दिनी मां कात्यायनी को शहद बहुत प्रिय है।
विशेष भोग: छठे दिन मां को शहद (Honey) का भोग लगाएं। इससे आकर्षण शक्ति बढ़ती है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
सप्तमी तिथि: मां कालरात्रि (25 मार्च)
संकटों को हरने वाली मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है।
विशेष भोग: सातवें दिन मां को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित करें। इससे आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है और घर में समृद्धि आती है।
अष्टमी तिथि: मां महागौरी (26 मार्च)
श्वेत वर्ण वाली मां महागौरी को नारियल का भोग अति प्रिय है।
विशेष भोग: अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं। इससे संतान संबंधी समस्याओं का निवारण होता है और मन की इच्छाएं पूरी होती हैं।
नवमी तिथि: मां सिद्धिदात्री (27 मार्च)
अंतिम दिन सभी सिद्धियों को देने वाली मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
विशेष भोग: नवमी के दिन मां को हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाएं। इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है, जिससे मां की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
क्यों खास है मां का डोली पर आगमन ?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब नवरात्रि गुरुवार (19 मार्च 2026) से शुरू होती है, तो मां दुर्गा पालकी या डोली में बैठकर आती हैं। यह सवारी संवेदनशीलता और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, लोक मान्यताओं में इसे राजनीतिक या सामाजिक बदलावों का भी संकेत माना जाता है, इसलिए इन नौ दिनों में मां की विशेष उपासना शांति और स्थिरता प्रदान करती है।

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